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UK: पहली बार उत्तराखंड के पहाड़ों में दिखा धारीदार बगुला, बैजनाथ में नजर आई दुर्लभ गेडवॉल

Tue, 18 Nov 2025 02:25 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर

सार

उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में पहली बार स्ट्रिएटेड हीरोन और दुर्लभ गेडवॉल जैसे पक्षी देखे गए हैं। ये प्रजातियां पहले सर्दियों में केवल मैदानी क्षेत्रों में प्रवास करती थीं, लेकिन अब नदियों के रास्ते तैरकर पहाड़ों तक पहुंच रही हैं।
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बागेश्वर के गरुड़ में दिखा गेडवॉल पक्षी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जलवायु बदल रही है तो जीवों के प्रवास और प्रसार का दायरा भी प्रभावित हुआ है। समुद्र, मैदानी नदियाें और जलाशयों के किनारे डेरा डालने वाले कुछ परिंदे तैरते हुए हिमालयी क्षेत्रों तक पहुंच गए हैं। उत्तराखंड के पहाड़ों में पहली बार स्ट्रिएटेड हीरोन देखी गई है। इसके अलावा दुर्लभ गेडवॉल ने भी दस्तक दी है। निम्न हिमालयी क्षेत्र यानी समुद्र तल से 600 से 1500 मीटर तक के ऊंचाई वाले इलाके में इनकी मौजूदगी रिकॉर्ड हुई है।

गेडवॉल और स्ट्रिएटेड हीरोन जैसी प्रजातियां पहले सर्दियों में मैदानी क्षेत्रों की ओर प्रवास करती थीं। अब जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पक्षियों की आदतों में साफ दिख रहा है। ये अब नदियों के रास्ते तैरकर पहाड़ों तक पहुंच रही हैं। पिछले दिनों चलाए गए बर्ड काउंट अभियान के नतीजों ने विशेषज्ञों को चौंका दिया। समुद्र तट के उड़कर प्रवास पर सितारगंज, हल्द्वानी और नानकमत्ता के जलाशयों तक आने वाले पक्षी भी पहाड़ में रचे-बसे नजर आए।

बागेश्वर के कपकोट में स्ट्रिएटेड हीरोन (धारीदार बगुला) और बैजनाथ में गेडवॉल (बतख प्रजाति) की उपस्थिति ने विशेषज्ञों को भी हैरत में डाल दिया। कपकोट की समुद्र तल से ऊंचाई 1,150 मीटर और बैजनाथ की लगभग 1,130 मीटर है। इतनी ऊंचाई तक इन पक्षियों ना पहुंचना दुर्लभ मामला है। 

परिंदों की उल्टी चाल ने किया हैरान

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पहाड़ों से मनुष्य अब भी शहरों की ओर पलायन कर रहा है मगर परिंदे उलटी राह पकड़कर पहाड़ों की ओर लौट रहे हैं। सर्दियों में आमतौर पर मैदानी जलाशयों में पहुंचने वाले ये प्रवासी अब पहाड़ी नदियों को भी पड़ाव बनाने लगे हैं। वैज्ञानिकों की मानें तो स्थानीय तापमान से तालमेल, नदियों में भोजन के नए विकल्प और कम प्रतिस्पर्धा होना नए आवासों की ओर इनके रुख का संकेत दे रही हैं।

 

बर्ड काउंट में मिलीं 43 प्रजातियां
बागेश्वर जिले के कपकोट और गरुड़ क्षेत्र में पक्षियों की कुल 43 प्रजातियां दर्ज की गईं। भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. दीपक कुमार के नेतृत्व में डॉ. भरत गिरि और टीम ने पक्षियों की गणना का कार्यक्रम चलाया गया। अभियान में पुष्टि हुई कि स्ट्रिएटेड हीरोन और गेडवॉल के अलावा ग्रेट कॉर्मोरेंट (बड़ा जलकाग) भी तय समय पर सर्दियों के साथ ही जिले में पहुंच चुका है।

 

क्या है स्ट्रिएटेड हीरोन

-स्ट्रिएटेड हीरोन को धारीदार बगुला भी कहते हैं।

 

-आकार में छोटा, पानी के किनारे चुपचाप शिकार करने वाला अत्यंत फुर्तीला पक्षी है।

 

-आमतौर पर तटीय इलाकों, समुद्री मैंग्रोव और मैदानी जलाशयों में पाया जाता है।

 

-पहाड़ी नदियों में इसकी मौजूदगी बेहद दुर्लभ मानी जाती है।

 

क्या है गेडवॉल

 

-गेडवॉल एक ग्रे-भूरी रंग की तैराक बतख है।

-सर्दियों में प्रवास पर आने वाली यह प्रजाति आम तौर पर मैदानी झीलों और तालाबों में दिखती है।

-इसका भोजन जलीय पौधे, घास और छोटे जलीय जीव होते हैं।

-हिमालय की नदियों में इसका दिखना बदलते प्रवास पैटर्न का महत्वपूर्ण संकेत है।

मौसम में हो रहे बदलाव के का असर पक्षियों में भी दिख रहा है। पक्षी भी अब अपना दायरा बढ़ा रहे हैं। बैजनाथ में गेडवॉल बतख और कपकोट में स्ट्रिएटेड हीरोन बगुला की उपस्थिति दर्ज की गई है। आमतौर पर ये पक्षी जिले में कम देखे जाते हैं। इसके अलावा ग्रेट कॉर्मोरेंट (बड़ा जलकाग) भी देखा गया। -डॉ. दीपक कुमार, प्राध्यापक और खोजकर्ता

आमतौर पर गेडवॉल और स्ट्रिएटेड सर्दियों में प्रवास पर मैदानी क्षेत्रों के प्रवास पर आते हैं। अब यह नदियों के रास्ते पहाड़ों तक भी अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। वहां के मौसम में इन्होंने खुद को ढालना सीख लिया है। नदियों में भोजन की अधिक विकल्प उपलब्ध होने से भी इनका पहाड़ की नदियों में दिखना एक कारण हो सकता है। -राजेश भट्ट, पक्षी विशेषज्ञ, कार्बेट नेशनल पार्क

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