बागेश्वर। जिला गठन के 23 साल बाद भी राशन आपूर्ति के लिए बने आठ खाद्यान्न गोदामों को अपना भवन नहीं मिल पाया है। किराए के भवनों में खाद्यान्न गोदाम संचालित होने से अक्सर राशन खराब होने की समस्या आती है। पूर्ति विभाग के 17 में से नौ खाद्यान्न गोदामों के पास अपना भवन है, जिनमें से काफलीगैर में 500 मीट्रिक टन का खाद्यान्न क्षमता वाले एक नए गोदाम का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ है।
कपकोट के हरसिला में 812 एसबीटी (सोट बोरा टाइप) क्षमता या 812 बोरे रखने की क्षमता का गोदाम किराए के भवन में चल रहा है। इसी प्रकार भराड़ी में 1216 एसबीटी, लीती में 1014 एसबीटी, लोहारखेत में 100 मीट्रिक टन, बदियाकोट में 1855 एसबीटी, कर्मी में 1624 एसबीटी, तलाई में 1515 एसबीटी और वाछम में 775 एसबीटी क्षमता के गोदाम किराए के भवन में चल रहे हैं।
किराए के अधिकतर गोदामों में सीलन से खाद्यान्न खराब होने की आशंका बनी रहती है। कपकोट के उच्च हिमालयी क्षेत्र में बदियाकोट, लीती, कर्मी, तलाई और वाछम में बरसात के दौरान अनाज की देखरेख करने में पूर्ति विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ता है। काफलीगैर में 500 मीट्रिक क्षमता वाले गोदाम का निर्माण होने से जिले में खाद्यान्न गोदामों की संख्या 17 हो गई है। अनाज भंडारण के लिए बागेश्वर में 500 मीट्रिक टन, काफली में 300 मीट्रिक टन, कांडा में 300 मीट्रिक टन, गरुड़ में 500 मीट्रिक टन, शामा में 100 मीट्रिक टन, उगिया में 100 मीट्रिक टन, खाती में 100 मीट्रिक टन और मल्खाडुंगर्चा में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बने है।
भराड़ी में 1000 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम बनाया जा रहा है। अधिक भंडारण क्षमता वाले इस गोदाम के बनने से कपकोट क्षेत्र के अन्य गोदामों में राशन की आपूर्ति करने में मदद मिलेगी। - अरुण कुमार वर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी बागेश्वर