बागेश्वर। कपकोट तहसील के कनलगढ़ घाटी में अतिवृष्टि ने वहां के लोगों का कभी न भूलने वाले जख्म दिए। आपदा से पहले बृहस्पतिवार की रात घाटी क्षेत्र के ग्रामीणों ने डर के साए में काटी। क्षतिग्रस्त मकानों, खेतों और संसाधनों को याद कर ग्रामीणों की आंखें भर आती हैं। कई ग्रामीणों ने डर के साए में रात ही घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों में शरण ली।
पौंसारी के खाईइजर से शुरू हुई तबाही ने पूरी कनलगढ़ घाटी को अपने आवेश में लिया। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि देर शाम से क्षेत्र में बारिश शुरू हुई रात 10 बजे से नदी-नालों का का जलस्तर बढ़ने लगा। जिससे लोग भयभीत होकर घरों से बाहर निकले। करीब साढ़े दस बजे ग्रामीणों ने एक दूसरे को आवाजें देना शुरू किया। पौंसारी गांव की ओर से भागो-भागो की आवाज आने लगी। जिसके बाद नदी नालों के किनारे बसे लोगों ने घरों को छोड़ना शुरू किया। लोगों ने अपने घरों को छोड़कर गांव में ही लोगों के घरों में शरण ली। सुबह होने के बाद क्षेत्र में बर्बादी का मंजर देख हर कोई अपनी जान बचने का शुक्र मना रहा था। लेकिन अपने आशियाने के छिन जाने का दर्द भी सहन नहीं हो पा रहा था। संवाद
कोट
रात में दस बजे भारी बारिश हुई, जिसमें मेरा पूरा मकान बह गया है। हमारा पांच लोगों का परिवार है। वर्तमान में सुरक्षा को देखते हुए सास ससुर के मकान में शरण ली है। मकान में रसोई गैस सहित अन्य कीमती सामान भी बह गए हैं। रात में खाना खाते समय अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से आभास हुआ कि बड़ा हादसा होने वाला है। - दीपा देवी
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जमीन और पनचक्की आपदा की भेंट चढ़ गई है। खेतों में खड़ी फसल तबाह हो चुकी है। रात में सोने के बाद जब सुबह उठे तो चारों ततरफ बर्बादी का मंजर था। गांव में कई लोगों के मछली के तालाब भी बह गए हैं। मकानों में दरारें आने से वहां रहना खतरा बना हुआ है। प्रशासन की टीम ने हमें सुरक्षित स्थानों में शिफ्ट करना चाहिए। - विनोद सिंह, ग्रामीण
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पौंसारी का खाईइजर तोक मेरा पैतृक गांव है। इस गांव से मेरी बहुत सारी यादें जुड़ी हैं। वर्तमान में परिवार के साथ जिला मुख्यालय रहता हूं। हादसे की खबर सुनकर में तड़के सुबह जिला मुख्यालय से यहां पहुंचा। यहां पहुंच कर देखा तो मंजर दिल दहलाने वाला था। पूरा खाईइजर तोक आपदा की भेंट चढ़ गया है। - नवीन जोशी,
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रात नौ बजे के बाद बारिश बढ़ गई जिससे ग्रामीणों को नुकसान हुआ हैै। गांव की चार पैदल पुल बह गई है। जिससे गांव में आवागमन की समस्या बनी हुई है। गांव में भूमि का कटाव होने से आवासीय मकानों को खतरा उत्पन्न हो गया है। हम लोगों ने रात भर जागकर किसी तरह जान बचाई है। - रमेश राम, ग्रामीण
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शाम आठ बजे से शुरू हुई बारिश ने रात 11 बजे विकराल रूप ले लिया। लोग रात में खाना खाकर सो गए। सुबह होते ही हम लोग यहां पहुंचे तो यहां सब कुछ रोखड़ में तब्दील हुआ था। जिसकी तत्काल सूचना प्रशासन को दी गई। पौंरारी गांव का कोई भी ग्रामीण में डर के मारे सो नहीं पाया। अब भी गांव में हालात डरावने हैं। - गोविंद सिंह गढि़या