बागेश्वर। मृदा दिवस के मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) काफलीगैर में रबी पूर्व कृषक सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास ने कृषि प्रदर्शनी का उद्घाटन, स्टालों का निरीक्षण कर किया। उन्होंने परंपरागत खेती में वैज्ञानिक विधि के समावेश पर बल दिया।
विधायक ने कहा कि बदलते परिवेश में मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए मिट्टी की जांच कराने एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करना जरूरी हो गया है। जिला पंचायत सदस्य रवि करायत ने केवीके द्वारा कृषकों को दिए जा रहे नए प्रजातियों के शोधित बीज, तकनीकी सहायता की सराहना की।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एससी पांडे ने विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के काम बताए। आजीविका के जिला परियोजना प्रबंधक धर्मेंद्र पांडे ने किसानों को परंपरागत कृषि को अपनाते हुए मडुवा, मादिरा, भट्ट के उत्पादन को बढ़ाकर कृषि को व्यवसाय के रूप में विकसित करने की सलाह दी।
कृषक-वैज्ञानिक संवाद के दौरान विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से आए वैज्ञानिक डॉ. आर रघु ने गेहूं की वैज्ञानिक खेती, डॉ. गणेश चौधरी ने रबी के मौसम में उगाई जाने वाली सब्जियों, कमल पांडे ने पर्वतीय क्षेत्रों में फलदार पौधों की वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी। पर्वतीय अरण्य सेवा समिति के प्रबंधक ललित कार्की ने अश्व कल्याण हेतु जिले में चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी।
कृषक केशव दत्त तिवारी, भीम सिंह, लक्ष्मी दत्त ने अपनी समस्याएं रखी। कृषक गोष्ठी का संचालन प्रक्षेत्र प्रबंधक मेदिनी प्रताप सिंह ने किसानों की समस्याओं का समाधान किया। डॉ. नवल किशोर सिंह ने कार्ययोजनाओं के बारे में बताया। हरीश जोशी, निधि सिंह, सुंदर सिंह कनवाल, विक्रम सिंह, जानकी मेहता आदि ने सहयोग दिया। सम्मेलन में बोहला, करालापालड़ी, चैगांवछीना, बेदीबगड़, हरखोला, खाकर, शामा, सूपी, गरुड़, कांडा, असों, पाना, डालखोलिया, छौना, बिलौरी, मटेला, खौलसीर, टाना, सैंज, ओखलीसिरोंद, भटखोला आदि गांवों के 301 किसानों ने प्रतिभाग किया।