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तो क्या इस बार बागेश्वर को मंत्रीमंडल में मिलेगा स्थान

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So will Bageshwar get a place in the cabinet this time
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बागेश्वर। राज्य गठन के बाद से बागेश्वर जिले को केवल तीन बार मंत्रीमंडल में प्रतिनिधित्व मिला है। पिछले नौ वर्षों की बात की जाए तो यहां के किसी भी विधायक को मंत्रीमंडल में स्थान नहीं मिल पाया है। स्थानीय निवासियों के जेहन में एक ही सवाल कौंध रहा है कि क्या प्रदेश के नए मुखिया बागेश्वर जिले को कोई मंत्री पद देंगे या नहीं।
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वर्ष 2000 में उत्तराखंड की अंतरिम सरकार में नारायण राम दास कैबिनेट मंत्री रहे थे। वर्ष 2002 से वर्ष 2007 तक एनडी सरकार में राम प्रसाद टम्टा मंत्री रहे थे। कपकोट के विधायक बलवंत भौर्याल वर्ष 2007 से 2012 तक कांडा के विधायक रहते हुए सरकार में पहले राज्यमंत्री और फिर कैबिनेट मंत्री का दायित्व निभा चुके हैं। वह इस बार कपकोट से विधायक हैं।
बागेश्वर सीट से चंदन राम दास लगातार तीन बार से विधायक चुनते आ रहे हैं। वह वर्ष 2007 से बागेश्वर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
वर्ष 2017 के चुनाव में जिले की दोनों सीट भाजपा की झोली में गई। उम्मीद थी कि मंत्रीमंडल में किसी एक विधायक को स्थान मिलेगा लेकिन त्रिवेंद्र सरकार में यह संभव नहीं हो पाया।
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त्रिवेंद्र के चार वर्ष के कार्यकाल में मंत्रीमंडल में शुरूआत से दो पद खाली रहे। कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत के निधन के बाद तीन पद रिक्त रहे लेकिन बागेश्वर ही क्या पिथौरागढ़, चंपावत जिले को प्रतिनिधित्व देने की जहमत त्रिवेद्र सिंह रावत ने नहीं उठाई। तीरथ सरकार में मंत्री पद के लिए चंदन राम दास के साथ ही बलवंत सिंह भौरियाल का दावा भी मजबूत है। चंदन राम दास लगातार तीन बार के विधायक हैं तो भौरियाल दो बार के विधायक होने के साथ ही पहले भी मंत्री रह चुके हैं। देखना दिलचस्प होगा कि तीरथ सिंह रावत बागेश्वर को कितनी तबज्जो देते हैं।
सोशल मीडिया के जरिए समर्थक बना रहे दबाव
बागेश्वर। बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास और कपकोट के विधायक बलवंत सिंह भौर्याल के समर्थक सोशल मीडिया के जरिए मत्रीमंडल में स्थान देने के लिए दबाव बना रहे हैं। आम लोग भी चंदन राम दास और बलवंत सिंह भौर्याल को मंत्री बनाने संबंधी पोस्ट सोशल मीडिया में डाल रहे हैं। मंत्रीमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने के सवाल पर जिले के दोनों विधायक कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जिले के लोग अवश्य चाहते हैं कि मंत्रीमंडल में जिले को प्रतिनिधित्व मिले, ताकि विकास की गति तेज हो।
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