जल विद्युत परियोजना कन्यालीकोट को ग्रिड से जोड़ते उरेडा के परियोजना अधिकारी रॉकी कुमार।
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उरेडा को आठ वर्षों से बंद पड़ी 100 केवी क्षमता वाली कन्यालीकोट लघु जल विद्युत परियोजना को यूपीसीएल की ग्रिड से जोड़ दिया है। ग्रामीण ऊर्जा समिति से उत्पादित बिजली को यूपीसीएल खरीदेगा। परियोजना से ऊर्जा समिति को महीने में 70 हजार रुपये का फायदा होगा।
कन्यालीकोट और इसके आसपास के घरों को रोशन करने के लिए उरेडा ने वर्ष 2005 में एक करोड़ रुपये की लागत से कनलगढ़ नदी में 100 किलोवाट क्षमता की लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया था। परियोजना का संचालन ग्रामीण ऊर्जा समिति के पास है। परियोजना से ग्रामीणों को रोजाना निर्धारित समय पर बिजली मिलती थी। समिति उपभोक्ताओं से बिजली का बिल वसूलती थी। उरेडा परियोजना की मॉनीटरिंग और तकनीकी जानकारी देती थी।
वर्ष 2010-11 में यूपीसीएल ने क्षेत्र के गांवों को ग्रिड से जोड़ दिया। ग्रिड से ग्रामीणों को पर्याप्त बिजली मिलने के कारण परियोजना बंद हो गई। उरेडा ने समिति को परियोजना को ग्रिड से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। समिति के अध्यक्ष दान सिंह ने उरेडा ने परियोजना को ग्रिड से जोड़ने का प्रस्ताव दिया। डेढ़ साल की मशक्कत के बाद उरेडा को मंगलवार को परियोजना को ग्रिड से जोड़ने में सफलता मिल गई।
100 किलोवाट क्षमता वाले प्लांट के ग्रिड से जुड़ने वाली यह जिले की पहली लघु जल विद्युत परियोजना है। इस समय से परियोजना की एक टरबाइन चल रही है। जैसे जैसे नदी में पानी की मात्रा बढ़ेगी अन्य टरबाइनें भी चलने लगेंगी। यूपीसीएल ग्रामीण ऊर्जा समिति से उत्पादित बिजली को निर्धारित दरों पर खरीदेगा। परियोजना से समिति को हर महीने 70 हजार रुपये की आय होगी। डेढ़ साल की कड़ी मशक्कत से परियोजना को ग्रिड से जोड़ने में यूपीसीएल के ईई भाष्कर पांडे का पूरा सहयोग मिला।
- रॉकी कुमार। परियोजना अधिकारी उरेडा बागेश्वर।