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स्मैक, चरस तस्करी का गढ़ बन रहा बागेश्वर

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Smacks, Bageshwar becoming a stronghold of Charas smuggling
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बागेश्वर। जिले में नशे का कारोबार बढ़ता ही जा रहा है। इसका सबसे बुरा प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है। चरस और स्मैक की तस्करी की कारोबार जिले में इस कदर फलफूल रहा है कि तीन साल के भीतर पुलिस ने 44.134 किलो चरस और 74.75 ग्राम स्मैक पकड़ी है। गौर करने वाली बात यह है कि स्मैक तस्करी के अधिकांश मामलों में युवा लिप्त पाए गए हैं। कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह युवाओं को मादक पदार्थों की तस्करी के गंदे धंधे की ओर ढकेल रही है।
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नशे के कारोबारी जिले में कई जगह सक्रिय हैं और युवाओं को अपने जाल में फंसा कर नशाखोरी और तस्करी करवा रहे हैं। उनके जाल में गांव से लेकर शहर तक के युवा फंसे हुए हैं। हर उम्र के लोग नशे की चपेट में हैं। नशे के कारोबार से होने वाली मोटी कमाई के झांसे में आकर पढ़े-लिखे युवा भी तस्करी के धंधे में लिप्त हो रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। अहम सवाल यह है कि चरस, स्मैक तस्करी में लिप्त लोग तो पकड़ में आ जाते हैं लेकिन इनके सरगनाओं तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाते।
तीन साल में पकड़े गए 41 धंधेबाज
बागेश्वर। जिले में हर महीने चरस, स्मैक तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान पुलिस ने नशे का कारोबार करने वाले 41 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस कार्यालय के अनुसार वर्ष 2018 में 13.500 किलो चरस के साथ 10 आरोपित गिरफ्तार किए गए। वर्ष 2019 में 21.500 किलो चरस और 16.59 ग्राम स्मैक के साथ 16 लोगों को पकड़ा गया। वहीं इस साल 9.134 किलो चरस और 58.16 ग्राम स्मैक के साथ 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह आंकड़े मादक पदार्थों की तस्करी के फैलते जाल की हकीकत बयां कर रहे हैं।
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