गरुड़ (बागेश्वर)। कुमाऊंनी संस्कृति की अनमोल विरासत बैठकी होली का रंग अब गांव-गांव में चढ़ने लगा है। हर शाम अलग-अलग घरों में संगीत की महफिल सज रही है जहां देर रात तक शास्त्रीय रागों और भजनों की गूंज सुनाई दे रही है।
क्षेत्र के सिल्ली गांव में होल्यारों की ओर से पारंपरिक कुमाऊंनी लोकगीतों और भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। हारमोनियम और तबले की थाप पर राग धमार और काफी जैसे रागों पर आधारित गायन ने पूरे गांव को उत्सव के माहौल में डुबो दिया है। मधुर स्वरों और वाद्य यंत्रों की संगत से ग्रामीण संस्कृति के प्रति गहरी आस्था प्रकट कर रहे हैं। होली समिति के डांगर और पूर्व बीईओ जीवन चंद्र दुबे ने बताया कि गांव में शिवरात्रि से ही होली का आगाज करने की परंपरा दशकों पुरानी है। बैठकी होली आपसी भाईचारे और सौहार्द को बढ़ावा देती है। इस मौके पर मनोज कृष्ण पांडेय, गणेश पांडेय, तारादत्त दुबे, रमेश खोलिया, डीके नेगी, सुरेश खोलिया, सभासद अंकित जोशी, प्रकाश दुबे, गुड्डू खोलिया, भुवन पांडेय, पंकज खोलिया, महेश नेगी, कैलाश खोलिया आदि मौजूद रहे।