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UK: पांच साल पहले जहां बजी थी शहनाई...आज वहीं है मातमी सन्नाटा, बलिदानी बलवंत के गांव की दर्दनाक तस्वीर

Thu, 09 Jul 2026 06:21 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, बागेश्वर

सार

मणिपुर में आतंकी हमले में शहीद हुए असम राइफल्स के वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल के पैतृक गांव बनडुंगरा में सन्नाटा है। पांच साल पहले यहां उनकी बेटी की शादी में शहनाइयां बजी थीं, लेकिन आज शहादत के बाद हर आंख नम है। 
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बलिदानी बलवंत का गांव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मणिपुर में हुए कायराना आतंकी हमले में शहीद हुए असम राइफल्स के वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल के पैतृक गांव बनडुंगरा (भाटनीकोट) में आज अजीब सी खामोशी पसरी हुई है। पांच साल पहले इसी गांव के आंगन से बलवंत सिंह ने अपनी बड़ी बेटी को ब्याह कर विदा किया था। तब गांव में शहनाइयां गूंजी थीं, लेकिन आज देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान के बाद हर आंख नम है।

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भले ही बच्चों की बेहतर शिक्षा और सुख-सुविधाओं के लिए परिवार हल्द्वानी शिफ्ट हो गया था, लेकिन गांव से उनका नाता कभी नहीं टूटा।स्कूलों की छुट्टियों और त्योहारों के समय बलवंत सिंह सपरिवार अपने गांव आते रहते थे। वीर सपूत को अंतिम विदाई देने और उनके अंतिम संस्कार में शिरकत करने के लिए गांव के सभी पुरुष हल्द्वानी रवाना हो चुके हैं, जिसके चलते अब गांव में महज महिलाएं ही बची हैं और पूरे तोक में सन्नाटा पसरा हुआ है। शहीद बलवंत सिंह के पैतृक गांव की स्थिति आज भी पहाड़ के पिछड़ेपन की कहानी बयां कर रही है। सामरिक दृष्टि से देश को वीर सैनिक देने वाला यह तोक आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से पूरी तरह महरूम है। ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए पुंगर नदी पर वर्षों पहले बने एक पुराने पुल को पार करना पड़ता है और इसके बाद करीब एक किलोमीटर की खड़ी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में समय पर सड़क पहुंच गई होती, तो शायद आज युवाओं का पलायन इस कदर न हुआ होता।
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