बागेश्वर के संगम पर श्राद्ध तर्पण करते लोग
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अष्टमी के श्राद्ध के मौके पर लोगों ने अपने पिता का श्राद्ध तर्पण किया। इस मौके पर पंडितों ने घर-घर जाकर भी श्राद्ध तर्पण कराए। इधर पवित्र सरयू और गोमती के संगम पर श्राद्ध तर्पण कराने वालों का तो सुबह से ही तांता लगा रहा। लोगों ने श्राद्ध के बाद पुरोहितों को दक्षिणा, चावल, मिठाई और फल भेंट किए।
बागनाथ मंदिर में पूजा कराने वाले पंडित हेम चंद्र जोशी का कहना है कि शिव महापुराण में सरयू और गोमती के संगम पर पित्तरों के श्राद्ध और तर्पण कराने का विषद वर्णन है। इस तीर्थ पर श्राद्ध कराना घर पर श्राद्ध कराने के समान ही है। पितृपक्ष में पितृलोक से पित्तर आकर अपनी पीढ़ी का इंतजार करते हैं। जो लोग इस तीर्थ पर अपने पित्तरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण कराते हैं उनसे प्रसन्न होकर पित्तर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
कहा कि पित्तर अपनी पीढ़ी के रग-रग में बसते हैं। माता पिता जब जीवित रहते हैं तो उनकी खूब करनी चाहिए। मृत्यु के बाद उनकी तिथि और पितृ पक्ष में अवश्य श्राद्ध करना चाहिए। कहा कि पित्तरों के प्रति श्रद्धा रखने वाला कभी भी परेशान नहीं रहता है।