फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शेखर रावत के खेत उगल रहे सोना

Tue, 14 Jul 2015 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर।
विज्ञापन
विज्ञापन
पल्ला कमस्यार के चकना गांव निवासी शेखर सिंह रावत प्राइवेट नौकरी छोड़ शाकभाजी और बागवानी के कार्य में जुटे हैं। मेहनत से उनके पथरीले खेतअब सोना उगलने लगे हैं। विभिन्न शाकभाजी और फलों की बिक्री से साल में उन्हें डेढ़ लाख रुपये की आय होने लगी है। वह खेतों में रोजाना आठ घंटा काम करते हैं।
विज्ञापन


चकना गांव के दिवंगत पूर्व सैनिक धाम सिंह रावत के पुत्र शेखर सिंह रावत  (42) बचपन से ही कर्मठ थे। इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह नौकरी की तलाश में दिल्ली चले गए। वहां उन्हें एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई। कुछ समय काम करने के बाद उन्होंने घर  जाकर शाकभाजी और फलोत्पादन करने का मन बनाया।

2013 में वह यहां एकीकृत आजीविका परियोजना के व्यापार समन्वयक मोहन चंद्र पांडे के संपर्क में आए। पांडे ने उन्हें उद्यान विभाग के कनिष्ठ उद्यान अधिकारी बीएस रावत से मिलाया। उद्यान अधिकारी से मिले टिप्सों को उन्होंने जीवन में उतार लिया। उन्होंने अपनी सात नाली भूमि में नीबू प्रजाति के पौधों की नर्सरी तैयार की।
विज्ञापन


नर्सरी में  अब 40 हजार पौध तैयार हो गए हैं। साथ में उन्होंने आलू, मूली,  लौकी,  गडेरी, शिमला मिर्च, टमाटर, बीन, कद्दू समेत ऑफ सीजन में होने वाली  विभिन्न प्रजाति की सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। वह सब्जियों को  बेचने के  लिए सानीउडियार, रावतसेरा और बेड़ीनाग के बाजार ले जाने लगे।

इससे उनकी आय बढ़ती गई। उन्होंने सब्जियों से हो रही आय को देखते हुए अब दो पॉलीहाउस  लगा दिए हैं। इसमें भी कई किस्म की सब्जियां पैदा होने लगी हैं। मछली पालन का काम उन्हें विरासत में मिला है। रावत बताते हैं कि इस  कार्य में उनकी  पत्नी बबीता का भी सहयोग मिल रहा है।

शाकभाजी, फल,  मछली और पशुपालन से उन्हें साल में डेढ़ लाख रुपये की आय हो रही है। उन्होंने कहा कि  स्थानीय स्तर के उत्पादों की बाजारों में काफी मांग है। रोजगार के लिए  पलायन से अच्छा तो युवाओं को तकनीकी शिक्षा लेकर घर पर  ही अपने कारोबार  खड़े करने चाहिए।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें