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नहरों के बंद होने से कमस्यार सेरा बर्बादी के कगार पर

Wed, 02 Nov 2016 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
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बंजर पड़े खेत - फोटो : अमर उजाला
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सरकार को कृषि और रोजगार परक योजनाओं की भारी कमी के कारण खाली हो रहे गांवों की फिक्र नहीं है। इन्हीं में से एक पल्ला कमस्यार घाटी का मुख्य सेरा भी है। जिसमें कभी भारी मात्रा में रबी, खरीफ फसलों के साथ ही शाक-भाजी हुआ करती थी। वह खेत आज नहरों में पानीनहीं होने से बंजर होते जा रहे है। परेशान ग्रामीणों ने अब इस मामले को आगामी विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाने की ठानी है। 
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जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर स्थित कमस्यार घाटी के मुख्य सेरे में कपूरी, बगराटी, खातीगांव, खांड़ी, अठपैसिया, पस्ट्यारी, भैंसखाल, भंडारीगांव, रावतसेरा, चकलीगांव,   महतगांव, कोटभंडार, भंडारीसेरा, पैठाण, कोश्यारीगांव, नौलियागांव, धौलियापाटा आदि गांवों के काश्तकारों की 15 हजार नाली से ऊपर भूमि है। खेेतों की सिंचाई के लिए कुलूर नदी से धौलियापाटा, भनार पैठाण, खातीगांव, धौलियापा नहर और कपूरी भंडारीगांव नहर बनी हैं। इन नहरों के हैड टूटने और पानी का तल नीचे चले जाने से नहरें बंद पड़ी हैं। पानी की कमी के कारण करीब आठ हजार नाली भूमि बंजर पड़ गई है।


भैंसखाल निवासी काश्तकार पूरन राम बताते हैं कि नहरों  में  पानी चलवाने के लिए सिंचाई विभाग को कई बार कह दिया है। लेकिन आज तक कोई  सुनवाई नहीं हो सकी है। बंजर खेतों का असर आबाद खेतों की उर्वरा शक्ति पर पड़ रहा है।
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