बागेश्वर। कभी हरियाणा में धूप की फैक्ट्री में नौकरी कर आजीविका चलाने वाले चौराखरक (तोली-कपकोट) निवासी प्रेम बल्लभ जोशी आज अपनी धूप फैक्ट्री चलाकर न केवल अच्छीखासी कमाई कर रहे हैं बल्कि 16 अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। शुद्ध जड़ी बूटियों से बनने वाले धूप, अगरबत्ती को न केवल गांधी आश्रम खरीदता है बल्कि राजस्थान के मेहंदीपुर स्थित प्रसिद्ध बालाजी के मंदिर में भी प्रेम के धूप की आपूर्ति होती है।
प्रेम बल्लभ ने छह साल तक हरियाणा की धूप फैक्ट्री में नौकरी की। वहां धूप, अगरबत्ती बनाने में जैसे ही प्रेम निपुण हुए उन्होंने अपनी माटी में लौटकर धूप, अगरबत्ती का व्यवसाय खोलने का निर्णय ले लिया और वर्ष 2017 में घर लौट आए। उन्होंने बागेश्वर के नदीगांव में किराए में मकान लिया। उद्योग विभाग के जरिये दो लाख का ऋण लेकर गोदावरी गृह उद्योग की स्थापना कर धूप, अगरबत्ती बनाने का काम शुरू कर दिया। धीरे-धीरे प्रेम का धूप उद्योग फलने-फूलने लगा। आज वह न केवल गांधी आश्रम को धूप, अगरबत्ती की सप्लाई करते हैं बल्कि बालाजी के मंदिर में उनके धूप की आपूर्ति की जाती है। अल्मोड़ा, बागेश्वर, कपकोट, गरुड़, कौसानी समेत तमाम स्थानीय बाजारों में शुद्ध जड़ीबूटी से निर्मित धूप को लोग हाथोंहाथ लेते हैं।
प्रेम ने धूप, अगरबत्ती, हवन सामग्री बनाने के लिए मशीनें लगाई हैं। उनके वहां पंचधूप, प्रियम धूप, दशांक धूप, पंचकोन नाम से धूप बनता है। अगरबत्ती की भी चार वैरायटी हैं। आज उनके वहां छह स्थानीय महिलाओं को नियमित रोजगार मिल रहा है। बताते हैं कि महीने में करीब दो लाख रुपये की धूप, अगरबत्ती बिक जाती है। इससे उन्हें करीब 35 हजार रुपये की शुद्ध आय हो जाती है। पलायन के इस दौर में प्रेम बल्लभ लोगों को रोजगार की राह दिखा रहे हैं। उन्होंने कर दिखाया है कि अपने पहाड़ में कर्मठ लोगों के लिए किसी चीज की कमी नहीं है। जरूरत है तो बस मेहनत और लगन की।
गांव में लगाए जड़ीबूटी प्लांट में 10 लोगों को मिल रहा रोजगार
बागेश्वर। कर्मठ उद्यमी प्रेम बल्लभ जोशी ने अपने गांव चौराखरक में जड़ीबूटियों का प्लांट लगाया है। जिसमें कपूर कचेरी, वन तुलसी, हिमालय तगर (समेऊ), गोकुल, जटामासी आदि जड़ीबूटी पैदा होती है। इन्हीं से धूप का निर्माण किया जाता है। उनके प्लांट में 10 किसानों को रोजगार मिला है। क्षेत्र के छह और किसानों को उन्होंने जड़ीबूटी का प्लांट लगाने के लिए प्रेरित किया। इन किसानों से वह जड़ीबूटी खरीदते हैं।