बागेश्वर। बोहाला ग्राम पंचायत के कठानी तोक स्थित राप्रावि कठानी को बंद होने से बचाने के लिए शिक्षक भजन दानू और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अनूठी पहल की है। उन्होंने दूसरे गांव के बच्चों को प्रवेश दिलाकर विद्यालय को नया जीवन दिया।
विद्यालय में एकमात्र छात्र के पांचवीं पास करने के बाद यह बंद होने की कगार पर था। आंगनबाड़ी केंद्र में भी कोई बच्चा नहीं था। गांव में छोटे बच्चे न होने से नए प्रवेश की उम्मीद नहीं थी। शिक्षक दानू ने स्कूल बचाने के लिए गांव का भ्रमण किया लेकिन पलायन के कारण कठानी में उन्हें कोई बच्चा नहीं मिला।
पड़ोस के घटगाड़ गांव में अभिभावकों से संपर्क करने पर वह दो बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने में सफल रहे। शिक्षक दानू ने बच्चों को निजी खर्च से कॉपियां भी मुहैया कराईं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भावना देवी और नीमा असवाल ने भी इस मुहिम में सहयोग किया है। वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्र में भी दो बच्चे हो गए हैं। शिक्षक और कार्यकर्ताओं की पहल की क्षेत्र में खूब सराहना हो रही है।
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इसी विद्यालय में हुई थी दानू की ज्वाइनिंग
शिक्षक दानू ने बताया कि उनकी पहली तैनाती इसी विद्यालय में 2014 में हुई थी। 2018 में उन्हें समायोजन पर पालड़ीछीना भेज दिया था। इस दौरान बोहाला, क्वैराली आदि स्कूलों में भी सेवाएं दी। सात महीने पहले फिर से उनकी तैनाती इस विद्यालय में की गई।
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छात्रसंख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने खूब मेहनत की है। कुछ शिक्षकों ने अच्छा परिणाम देकर दूसरे के लिए प्रेरणास्रोत का कार्य भी किया है। सभी शिक्षक इसी तरह से मेहनत करेंगे तो स्कूलों को बंद होने से बचाने में मदद मिलेगी।
विनय कुमार, सीईओ, बागेश्वर