कपकोट/बागेश्वर। कपकोट के मां भगवती मंदिर में ऐठानी वंशजों की सौपाती पूजा का शुभारंभ हुआ। प्रत्येक तीसरे वर्ष होने वाली इस पूजा में 10 गांवों के ऐठानी वंशज भागीदारी करते हैं। पूजा का समापन 20 सितंबर को विशाल भंडारे के साथ होगा।
पांच दिवसीय पूजा के शुभारंभ पर भगवती मंदिर से ढोल, नगाड़े के साथ सरयू तट तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इसमें पारंपरिक परिधान में महिलाएं शामिल हुईं। सरयू नदी में देव डांगरों ने स्नान किया। इसके बाद मंदिर में पंडित प्रकाश जोशी, बसंत जोशी और राकेश जोशी ने विधिवत पूजा की।
कमेटी अध्यक्ष किशन सिंह ऐठानी ने बताया कि पूजा में नगर और ग्रामीण क्षेत्र के बमसेरा, ऐठाण, रिखाणी, भानी, खाईबगड़, पालीडुंगरा, हिचौड़ी, भयूं, जसरौली और सुनेता में रहने वाले ऐठानी परिवार भाग लेते हैं। 19 सितंबर की शाम मुख्य पूजा में शामिल होने के लिए पेठी के देवली वंशज देव डांगर आएंगे।
कलश यात्रा में व्यवस्थापक दयाल ऐठानी, खीम सिंह ऐठानी, हरीश ऐठानी, नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद बिष्ट, व्यापारी शेर सिंह ऐठानी, चंपा देवी, गीता ऐठानी, सुनीता ऐठानी, प्रेमा ऐठानी, गंगा ऐठानी, कमला ऐठानी, हेमा देवी आदि मौजूद रहे। संवाद
आठूं पूजा के पहले दिन हुई अनाज भरने की रस्म
कपकोट। पोथिंग गांव के भगवती मंदिर में नंदाष्टमी महोत्सव या आठूं पूजा का शुभारंभ अनाज भरने की रस्म के साथ हुआ। गांव के सभी घरों से लोग एक-एक पैसेरी (दो-दो किलोग्राम) गेहूं लेकर मंदिर पहुंचे। इस अनाज को मंदिर के घराट में पीसा जाएगा और पूजा के समापन पर होने वाले भंडारे में इसी से प्रसाद बनाया जाएगा। कपकोट के बदियाकोट, कर्मी, बैछम में भी आठूं पूजा का शुभारंभ हो गया है।