बागेश्वर। कोरोना काल में स्वास्थ्य महकमे की बेहतर काम कर रहा है लेकिन कुछ गंभीर लापरवाही भी सामने आ रही है। जिले के सेरी (कमेड़ीदेवी) में 20 दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने बुखार की शिकायत पर गांव के 162 लोगों की आरटी-पीसीआर जांच कराई लेकिन लंबा अंतराल बीतने के बाद भी सैंपलों की जांच रिपोर्ट नहीं आई। मंगलवार की क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता ने इस पर आपत्ति की तो स्वास्थ्य महकमे ने बुधवार को गांव में शिविर लगाकर 74 लोगों के रैपिड एंटीजन टेस्ट कराए, जिसमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
जानकारी के अनुसार मई की शुरूआत में सेरी गांव में अधिकांश लोग बुखार, खांसी, सरदर्द और जुकाम से पीड़ित थे। इस पर छह मई को स्वास्थ्य विभाग ने सेरी गांव के 162 लोगों के आरटी-पीसीआर जांच के लिए सैंपल लिए थे, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी लोगों की जांच रिपोर्ट नहीं आई। संक्रमण फैलने की डर से गांव के लोग सहमे रहे। सामाजिक कार्यकर्ता कमल भौर्याल ने मंगलवार को सीएमओ डॉ. बीडी जोशी के साथ ही प्रशासन के सामने मामला उठाया। भौर्याल के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने रिपोर्ट कहीं गुम होने की बात बताई और बुधवार को गांव में टीम भेजने की बात कही थी।
भौर्याल ने बताया कि मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में शिविर लगाकर करीब 74 लोगों की रैपिड एंटीजन विधि से जांच की। किसी में संक्रमण नहीं पाया गया। अब गांव में हालात सामान्य हैं। कोई भी बुखार, जुकाम से पीड़ित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही घातक हो सकती है। लोग रिपोर्ट के इंतजार में थे, रिपोर्ट न आने से लोग चिंतित हो उठे थे। कोरोना काल में ऐसी लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
सेरी गांव का मामला मंगलवार को ही संज्ञान में आया था। मालूम हुआ है कि सेरी में छह मई को लिए गए सैंपल किन्हीं कारणों से रिजेक्ट हो गए थे। मंगलवार को ही सेरी में शिविर लगाकर लोगों के सैंपल लेने के निर्देश दिए थे। बुधवार को गांव में रैपिड एंटीजन से जांच की गई। - डॉ. बीडी जोशी मुख्य चिकित्साधिकारी बागेश्वर