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सड़क की कमी से मुश्किल हो सकती है संसद की राह

Thu, 14 Mar 2019 11:47 PM IST
दीपक नेगी ब्यूरो/अमर उजाला/बागेश्वर
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गांवों में सड़क नहीं पहुंचने और खस्ताहाल सड़को से भी दावेदारों की संसद की राह मुश्किल हो सकती है। पहले ही रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा देकर जनता ने आक्रोश दिखा दिया है। वहीं चुनाव में विपक्ष और क्षेत्रीय दल भी सड़क को मुद्दा बना सकते हैं।

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सड़क को विकास की धुरी माना जाता है। सड़क पहुंचने के बाद स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार आदि का विकास होता है। इधर राज्य गठन के 19 साल बाद भी कुमाऊं की काशी बागनाथ में विकास का पहिया नहीं घूम सका है। आजादी के 72 साल बाद भी ग्रामीण बुनियादी जरूरत सड़क के लिए आंदोलन कर रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि सड़कें बनाने के लिए योजनाएं परवान नहीं चढ़ी लेकिन कभी वन विभाग की मंजूरी नहीं मिली तो कभी खाली खजाने के कारण सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। 

इस चुनाव में जनता सड़क को लेकर सांसद दावेदारों को घेरने का मन बना रही है तो विपक्ष भी इसे चुनावी मुद्दा बनाने पर तुला हुआ है। पीएमजीएसवाई, लोनिवि बागेश्वर, कपकोट ईई के मुताबिक सड़कों के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण का मामला लंबित हैं। वन विभाग से मंजूरी मिलते ही सड़कों पर काम शुरू किया जाएगा।
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वन विभाग की मंजूरी से इन सड़कों का निर्माण अटका

  • 15 किमी लंबी मुनार- लाहुर- मिकिला खल्पट्टा सड़क
  • अटल आदर्श गांव भंडारी गांव।
  • खडलेख-भनार सड़क से पांच किमी लंबी नैकाना-बसोड़ा सड़क।
  • 25 किमी लंबी बदियाकोट-बोरबलड़ा सड़क।
  • बागेश्वर- कपकोट- तेजम सड़क के किमी 33 से 3.50 किमी लंबी किरौली सड़क।
  • 4.77 किमी लंबी सूपी-हरकोट सड़क
  • कपकोट-पिंडारी सड़क से 11.25 लंबी काफलीकमेड़ा सड़क।
  • 11.30 किमी उगियां-सोराग सड़क।
  • 23.45 किमी बदियाकोट-कुंवारी सड़क।
  • शामा-तेजम सड़क से 3.28 किमी लंबी बड़ी पन्याली सड़क।
  • कपकोट-पिंडारी सड़क के किमी सात से 7.5 किमी लंबी सड़क।
  • रिखाड़ी-बाछम सड़क के किमी 41 से छह किमी लंबी खाती सड़क। 
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