बागनाथ मंदिर के साथ बागेश्वर की पहचान जुड़ी है, लेकिन आधुनिक सुख सुविधाओं के दौर में यह ऐतिहासिक स्थल वाहन पार्किंग, पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से घिरा है। स्थानीय लोगों के साथ ही देश, विदेश से आने वाले सैलानी भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं।
बागनाथ मंदिर के पौराणिक, ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए स्थानीय लोगों के साथ ही बाहरी इलाकों के श्रद्धालु भी यहां आते हैं। कौसानी, बैजनाथ, चौकोड़ी जाने वाले पर्यटक बागनाथ मंदिर समेत यहां की अन्य धरोहरों को देखने के लिए आते हैं।
बाजार की सड़क से मंदिर की पैदल दूरी मात्र डेढ़ सौ मीटर है, लेकिन जिला मुख्यालय पर वाहनों की पार्किंग की सुविधा न होने के कारण पर्यटकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। वाहन पार्किंग की व्यवस्था के अभाव में पर्यटक चाहकर भी यहां नहीं रुक पाते हैं।
स्थानीय लोग यहां गोमती पुल के पास पार्किंग बनाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन नदियों के किनारे निर्माण पर रोक लगी होने के कारण यह काम भी नहीं हो सका है। बागनाथ मंदिर से सरयू के दूसरी तरफ आवागमन करने के लिए पुल न होने के कारण भी लोगों को लंबी दूरी तय करनी होती है।
यहां स्वीकृत पैदल पुल का निर्माण कार्य तकनीकी औपचारिकताओं के चलते शुरू नहीं हो सका है। बागनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पूरन सिंह रावल का कहना है कि संगम के पास सरयू में मंदिर की तरफ घाटों का निर्माण हो चुका है, लेकिन नदी के दूसरी ओर घाट नहीं बने हैं। दोनों तरफ घाटों का निर्माण होने से श्रद्धालुओं की असुविधा दूर हो जाएगी।
बागनाथ मंदिर के पास ही संगम के पास श्मशान घाट है, जहां दिनभर शवदाह का सिलसिला चलता रहता है। शवदाह के कारण प्रदूषण की समस्या दिनोंदिन बढ़ रही है, इस समस्या के समाधान के लिए नगर पालिका वर्षों से विद्युत शवदाह गृह बनाने को प्रयासरत है, लेकिन इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है।