फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

190 हैक्टेयर भूमि पर बोई रामदाना पर लगा कीड़ा

Wed, 04 Oct 2017 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
विज्ञापन
कपकोट के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में बर्बाद हुई रामदाना की फसल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
कपकोट विकास खंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में धान की पैदावार नहीं होती है। वहां बरसात में किसान रामदाना यानि चौलाई बोते हैं। इसके पत्ते जहां सब्जी के काम आते हैं वहीं इसके दानों को पनचक्की में पीसकर इसका आटा तैयार किया जाता है। किसान अपनी आवश्यकता पूर्ति के बाद इसे बाजार में बेचते हैं जबकि अन्य स्थलों पर लोग व्रत के दिन रामदाना से बने आटे की रोटी और लड्डू बनाकर खाते हैं। इस बार की फसल कीटों की भेंट चढ़ जाने से किसान मायूस हैं। 
विज्ञापन


कपकोट ब्लॉक के उच्च हिमालयी क्षेत्र के करीब 22 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे गांवों में कर्मी, बघर, ढोक्टीगंाव, बाछम, खाती, सोराग, तीख, कालो, बघर, कुंवारी, बोराचक झारकोट आदि गांवों में किसान रामदाना बोते हैं। गांवों में रामदाना की फसल प्रचुर मात्रा में होती है। उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों के लोग इसकी रोटियां हमेशा खाते हैं। एक किसान के खेत में पांच से 10 कुंतल तक रामदाना होता है। किसान अपनी आवश्यकता की पूर्ति करने के बाद बांकी उपज को बाजार में बेच देते हैं।

बाजार में यह 40 से 70 रुपये प्रति किलो तक बिकता है। इससे किसानों की अच्छी खासी आय भी होती है। इस बार फसल को पणजालक कीट ने अपने आगोश में ले रखा है। कीटों ने जहां दानों को बुरी तरह बर्बाद कर दिया है वहीं पत्तों को भी तबाह कर दिया है। जिपं सदस्य गोविंद दानू ने बताया कि कीटों के नुकसान से जहां किसानों के पास अब अगले साल बीच तक को दाने नहीं बचे हैं, वहीं फसल को भारी क्षति होने के कारण किसानों के सामने अब अनाज का भी संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने शासन और कृषि विभाग से प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा और बीज उपलब्ध कराने की मांग की है।  
विज्ञापन


-रामदाना की फसल को हुई क्षति का आकलन कराने के लिए कृषि विभाग को निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने पर मुआवजे के लिए मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से बात करेेंगे। 
-बलवंत भौर्याल, विधायक कपकोट। 

-रामदाना की फसल पर प्रथम दृष्टया पणजालक कीट लगा हुआ है। इसकी वृहत जांच के लिए कृषि विभाग के कर्मी और कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के वैज्ञानिक प्रभावित गांवों में गए हैं। कृषि कर्मियों को कीटनाशक दवाओं के साथ भेजा गया है। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट आते ही उसे शासन को भेजा जाएगा। शासन से प्रभावितों को मुआवजा देने की सिफारिश की जाएगी।    
विज्ञापन

-वीपी मौर्य, मुख्य कृषि अधिकारी बागेश्वर। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें