बागेश्वर। बागेश्वर की राजनीति के सरल, मिलनसार, सौम्य नेताओं में शुमार चंदन राम दास का निधन पूर्व कैबिनेट मंत्री राम प्रसाद टम्टा के वार्षिक श्राद्ध के दिन हुआ। राजनीति की बिसात पर एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देने वाले दोनों नेता जनप्रिय थे और जिले की राजनीतिक बिसात पर भी दोनों नेताओं का कद बराबर का था। दोनों नेताओं को उत्तराखंड सरकार में मंत्री बनने का अवसर भी हासिल हुआ। स्व. टम्टा की बरसी पर चंदन राम दास का शरीर छोड़ना पूरे दिन लोगों की जुबां पर रहा और लोग अपने प्रिय नेताओं की याद में शोकाकुल रहे।
चंदन राम दास पहली बार वर्ष 2007 में कांग्रेस के प्रत्याशी राम प्रसाद टम्टा को हराकर बागेश्वर सुरक्षित सीट से विधायक बने थे। उस समय राम प्रसाद टम्टा कांग्रेस के कद्दावर नेता हुआ करते थे और उनकी जीत तय मानी जा रही थी। दास ने न सिर्फ उस चुनाव में बल्कि वर्ष 2012 में भी कड़े मुकाबले में टम्टा को मात देकर दोबारा विधानसभा की सीट अपने नाम की। लगातार दो चुुनाव में जीत ने जहां दास के कद को काफी बड़ा कर दिया, वहीं टम्टा का राजनीतिक भविष्य हाशिये की ओर धकेल दिया।
लगातार दो हार के बाद भी लोगों के बीच टम्टा का प्रभाव बरकरार था लेकिन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर नए प्रत्याशी बालकृष्ण को प्रत्याशी घोषित कर दिया। एक ओर युवा जोश और दूसरी ओर दो बार के विधायक दास में कड़े मुकाबले की उम्मीद थी लेकिन सारे कयास धरे रह गए। तीसरा विधानसभा चुनाव दास ने सभी चुनावों में सर्वाधिक मतांतर से अपने नाम किया। लगातार तीन जीत के बाद उनको मंत्री बनाने की मांग जोरशोर से उठी लेकिन उन्हें मंत्री पद नहीं मिला।
वर्ष 2022 के चुनाव में भाजपा ने फिर से दास पर भरोसा जताया जबकि कांग्रेस ने फिर एक नए उम्मीदवार पर दांव खेलते हुए रंजीत दास को मैदान में उतारा। यह चुनाव भी चंदन राम दास ने आसानी से जीत लिया। इस बार के चुनाव की जीत उन्हें मंत्री पद तक ले गई लेकिन गिरती सेहत उनके लिए चुनौती बनकर खड़ी थी। 23 मार्च 2022 को कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेने के एक साल बाद ही वह दुनिया को अलविदा कह गए। संवाद
वर्ष 2017 में सर्वाधिक, 2012 में सबसे कम रहा जीत का अंतर
बागेश्वर। वर्ष 2007 के चुनाव में चंदन राम दास ने कांग्रेस के राम प्रसाद टम्टा को 5890 के अंतर से हराया था। चुनाव में दास को 17,614 और टम्टा को 11,724 मत मिले। वर्ष 2012 में दास को 23,396 और टम्टा को 21,485 मत मिले। चुनाव में जीत का अंतर 1911 वोट रहा। इसी तरह वर्ष 2017 में दास 14,567 वोट से जीते। उन्हें 33,792 जबकि प्रतिद्वंदी कांग्रेस के बालकृष्ण को 19,225 मत मिले। वर्ष 2022 में दास को 32,211 वोट और कांग्रेस के रंजीत दास को 20,070 वोट हासिल हुए। दास की जीत का अंतर 12,141 वोट का रहा।