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बगैर अनुमति के देहरादून से बागेश्वर आने के मामले में दो खिलाफ अभियोग दर्ज

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बागेश्वर। बगैर अनुमति के वाहनों से लोगों का बागेश्वर आने का सिलसिला जारी है। पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही 14 दिन के लिए संस्थागत क्वारंटीन कर दिया है। शनिवार को भी दिल्ली से बगैर अनुमति के आए चालक, परिचालक समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
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कोतवाली पुलिस के अनुसार शनिवार शाम बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के हरियाणा से रुद्रपुर और रुद्रपुर से बागेश्वर आने पर वाहन यूके 06 एएच 6214 (अल्टो) में सवार होशियार सिंह निवासी ग्राम दोगाड़ कपकोट, हीरा सिंह निवासी ग्राम बघर थाना कपकोट, परवीन सिंह निवासी ढोक्टी कपकोट, हरीश सिंह निवासी ग्राम बघर कपकोट और वाहन यूके 03 ए 1182 (आई-10) में सवार भगवत सिंह निवासी ग्राम दोबाड़ कर्मी थाना कपकोट, भगवत सिंह निवासी ग्राम दोबाड़ कर्मी थाना कपकोट, नवीन सिंह निवासी ग्राम दोबाड़ कर्मी थाना कपकोट, हरीश सिंह निवासी ग्राम बघर कपकोट को मेडिकल के बाद 14 दिन के लिए एक होटल के संस्थागत क्वारंटीन में भेज दिया।
कोतवाली प्रभारी डीआर वर्मा ने बताया कि रविवार को ग्राम सिमी नरगोल निवासी गोपाल राम, बची राम निवासी बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के हरियाणा से गिरेछीना तक वाहन से आए और गिरेछीना से बागेश्वर तक पैदल आने पर उनका मेडिकल कराया गया। इसके बाद 14 दिन के संस्थागत क्वारंटीन के लिए भेज दिया। इन सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 188/269 और 51ख आपदा प्रबंधन अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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दून से यात्रियों को लाने वाले चालक-परिचालक पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई
12 मई को देहरादून से बस से 34 यात्रियों को बिना अनुमति लेकर आए थे
बागेश्वर। बिना अनुमति 12 मई की रात देहरादून से 34 यात्रियों को बागेश्वर लाने वाले रोडवेज के चालक-परिचालक पर कार्रवाई न होना पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। हालांकि, इस बस से आए उन दो यात्रियों पर जरूर मुकदमा दर्ज किया गया जो मौके से भाग गए थे। हालांकि, बाद में उन्हें पकड़ लिया गया। सभी यात्रियों को 14 दिन के लिए संस्थागत क्वारंटीन कर दिया था।
12 मई की रात देहरादून से 34 यात्री रोडवेज की बस यूके 07 पीए 3166 से बागेश्वर पहुंचे थे। रात में इन सभी को जिला मुख्यालय के बिलौना में बने प्रवासी सेंटर में ठहराया गया। 13 मई की सुबह इन लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इन लोगों के पास न तो कोई अनुमति पत्र था और ना ही जरूरी दस्तावेज। मात्र एक कागज पर इनके नाम लिखे थे, जिसे रास्ते में कई जिलों की सीमाओं पर दिखाते हुए ये लोग बागेश्वर पहुंच गए।
प्रशासन ने बगैर अनुमति आने पर सभी यात्रियों को 13 मई को बागेश्वर में 14 दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया था। 34 यात्रियों में आठ बच्चे और आठ महिलाएं हैं।
क्वारंटीन किए गए बागेश्वर के खोली निवासी एक व्यक्ति से रविवार को अमर उजाला ने फोन पर बात की। उक्त व्यक्ति का कहना था कि 12 मई की सुबह किसी व्यक्ति का फोन आया कि बस बागेश्वर जा रही है, उससे चले जाओ। इस व्यक्ति को उक्त व्यक्ति नहीं जानता। बताया कि उन्होंने देहरादून के क्लेमेंटटाउन थाने में बागेश्वर जाने के लिए पंजीकरण कराया था। सोचा कि वहीं से फोन आया होगा। बताया कि अन्य यात्रियों के साथ भी ऐसा ही हुआ। किसी भी यात्री के पास अनुमति पत्र नहीं था। बगैर पास के आए इन लोगों को क्वारंटीन कर दिया गया, लेकिन सवाल यही है कि यात्रियों को लाने वाले बस चालक-परिचालक को बगैर कार्रवाई के क्यों छोड़ दिया गया। यात्रियों को बस से बागेश्वर भेजने वाला कथित व्यक्ति कौन था?
12 मई की रात बगैर अनुमति के रोडवेज की बस से 34 लोग बागेश्वर पहुंचे थे। बस का भी पास नहीं था। इनमें से दो लोग यहां पहुंचने पर भाग गए थे। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। सभी लोगों को संस्थागत क्वारंटीन किया गया है। - राकेश तिवारी, एसडीएम, बागेश्वर।
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