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सीएससी को भुगतान का आदेश वापस ले सरकार

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अल्मोड़ा/काफलीखान। ग्राम प्रधान संगठन ने ग्राम पंचायत निधि से सीएससी को 2500 रुपये प्रतिमाह देने का विरोध कर चार सूत्री मांगों को लेकर डीडीओ केके पंत के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। प्रधान ने सरकार के इस निर्णय को वापस न लेने पर आंदोलन शुरू करने के साथ ही न्यायालय की शरण लेने की चेतावनी दी है।
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ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार ने 15वें वित्त से ग्राम पंचायतों को दी जाने वाली राशि में भी भारी कटौती कर दी है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार पंचायतों को सशक्त बनाने का दावा कर रही है, दूसरी तरफ ग्राम पंचायतों के वित्तीय संसाधनों में कटौती कर रही है। वहीं मनरेगा कर्मियों की हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकार से मांग की गई कि विकास कार्य पटरी पर लाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करे।
संगठन ने प्रधानों का मानदेय 1500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने और पांच हजार मासिक पेंशन देने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि ग्राम प्रधान के अधीन कार्य करने वाले ग्राम प्रहरी को सरकार उनसे अधिक दो हजार रुपये मानदेय दे रही है, जबकि ग्राम प्रधानों को मात्र 1500 रुपये ही मानदेय मिल रहा है।
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चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र चार सूत्री मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई तो प्रधान पूरे प्रदेश में आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उच्च न्यायालय की भी शरण ली जाएगी। प्रधानों ने ज्ञापन की प्रति डीपीआरओ जीएस अधिकारी को भी सौंपी है। ज्ञापन देने वालों में प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष धीरज गैलाकोटी, हवालबाग ब्लॉक के अध्यक्ष देव सिंह भोजक, सैनार के प्रधान अर्जुन सिंह, गरगूंठ के प्रधान मुकेश कुमार, तलाड़बाड़ी के प्रधान किशन सिंह बिष्ट, डोबा के प्रधान गोपाल तिवारी आदि रहे।
बागेश्वर। ग्राम पंचायतों में खोले गए सीएससी को 2500 रुपये मासिक भुगतान के आदेश से ग्राम प्रधानों में गहरी नाराजगी है। प्रधान संगठन ने सोमवार को जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। प्रधानों ने आदेश को जबरन लागू करने पर सरकार के खिलाफ आंदोलन की चेेतावनी दी।
अखिल भारतीय जिला ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष भुवन सिंह ऐठानी ने कहा कि ग्राम पंचायतों में खोले गए सीएससी ने पंचायत से संबंधित कोई भी कार्य नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी ग्राम पंचायत से सेंटर को भुगतान नहीं किया जाएगा। कहा कि इस तरह से भुगतान करना सरकारी धन का दुरुपयोग होगा।
ग्राम प्रधानों ने 15वें वित्त में हो रही भारी कटौती पर भी रोक लगाने को कहा। प्रधानों का वेतन प्रतिमाह 1500 रुपये बढ़ाकर 10 हजार करने की भी मांग की। कहा कि ग्राम प्रहरी प्रधान के अधीन कार्य करता है और उसे प्रतिमाह 2000 रुपये वेतन मिलता है। वहीं प्रधानों को वेतन के नाम पर अल्प राशि दी जा रही है।
ग्राम प्रधानों ने वेतन बढ़ाने के साथ ही 5000 रुपये प्रतिमाह पेंशन लागू करने की भी मांग की। प्रधानों ने सरकार से सभी समस्याओं का निदान करने की मांग की। पंचायती राज सचिव की ओर से जारी आदेश को जल्द वापस लेने को कहा।
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