बौन गांव से पहुंचे जड़ीबूटियों के व्यापारी दंपत्ति।
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उत्तरायणी मेले के मौके पर लगने वाली प्रदर्शनियां लोगों को स्वावलंबन के लिए प्रेरित कर रही हैं। मेलार्थी स्थानीय उत्पादों की जानकारी लेने के साथ ही उनकी खरीदारी भी कर रहे हैं। उद्यमियों का कहना है यदि प्रशासन उन्हें दुुकान के लिए जगह और बिजली का किराया न्यूनतम दरों पर उपलब्ध कराए तो मेले में कई अन्य उद्यमी अपने उत्पादों को लेकर मेले में आ सकते हैं।
उत्तरायणी मेले में प्रदर्शनी मैदान में सजी वन विभाग की प्रदर्शनी मेलार्थियों को जल, जंगल, पानी और पर्यावरण की सुरक्षा करने का संदेश और जानकारी दे रही है। वहीं उद्यान विभाग स्टॉल लोगों को विभिन्न किस्म की सब्जियों का उत्पादन करने, उद्योग विभाग ऊनी कारोबार करने, रेशम विभाग लोगों को शहतूत की खेती करनेे, कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर की प्रदर्शनी किसानों को उन्नतशील बीजों की वैज्ञानिक आधार पर खेती करके आमदनी दोगुनी करने, पशुपालन विभाग लोगों को गाय, भैंसों को पालने, खादी ग्रामोद्योग विभाग की प्रदर्शनी लोगों को उद्योग और लघु उद्योग लगाकर अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहें हैं। मेलार्थी स्टॉल प्रभारियों से तमाम जानकारी लेने के साथ ही वहां से खरीददारी भी कर रहे हैं।
दूर-दूर से पहुंचे हैं उद्यमी
उत्तरायणी मेले में सरकारी प्रदर्शनियों के अलावा भोटिया पड़ाव में मुनस्यारी, धारचूला, डीडीहाट, फरसाली आदि क्षेत्रों से ऊनी वस्त्र, दन, कालीन, चुटके, थुलमे, आसन, पूजा के काम आने वाले चौंर गाय की पूंछ आदि सामान दुकानों में सजा हुआ है। बौनगांव के सरपंच किशन बोनाल और उनकी प्रधान पत्नी आशा देवी ने ईष्टदेव समूह बौन धारचूला के सहयोग के उगाए गए विभिन्न किस्म की जड़ीबूटियां, जटामांसी और गोकुल धूप की दुकान सजा रखी है। जाख हड़बाड़ से आए केशव दत्त जोशी हाथ से बनाया पीठ्या लेकर आए हैं। इसी तरह श्री नौला में कपकोट मल्लादानपुर क्षेत्र के कई उद्यमी रिंगाल से बने डाले, सूपे और चटाइयां लेकर पहुंचे हैं।