बागेश्वर जिले में गोभी परिवार से ताल्लुक रखने वाली सब्जी केल का उत्पादन होने लगा है। कांडा तहसील क्षेत्र की तीन महिलाओं ने पहली बार अपने खेतों में इसे परीक्षण के तौर पर उगाया। परीक्षण सफल होने के बाद उद्यान विभाग पूरे जिले के किसानों को केल की खेती के लिए प्रेरित करने की योजना बना रहा है। खंतोली की भगवती पंत, चंद्रा पंत और कल्पना पंत ने पहली बार मुनस्यारी में केल सब्जी के बारे में सुना। उन्हें इसका स्वाद बेहद पसंद आया तो वापसी में वह सब्जी के बीज भी उठाकर लाईं।
गांव आने के बाद महिलाओं ने उद्यान विभाग के सचल दल केंद्र प्रभारी कमल पंत से जिक्र किया और उनकी राय लेकर अक्तूब-2024 में खुले खेत में इसके बीजों की बोवाई की। एक महीने बाद ही केल की पत्तियां सब्जी बनाने लायक हो गईं थी। नवंबर से जून तक महिलाओं ने पत्तियों का प्रयोग किया।
सब्जी बनाओ या कच्चा खाओ, हर हाल में गुणकारी
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के प्रभारी डॉ. राजकुमार ने बताया कि केल हरी पत्तेदार सब्जी है, जो ठंडी और शुष्क जलवायु में पैदा होती है। पाला गिरने से भी इसकी पत्तियों को नुकसान नहीं होता है। केल के पत्तों से हरी सब्जी बनती है, इसे सलाद के रूप में कच्चा भी खाया जाता है। विटामिन, खनिज और एंटी ऑक्सिडेंट से भरपूर केल का सेवन मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर जैसी बीमारियों को रोकने में मदद करता है। इसमें विटामिन ए, सी, के, पोटेशियम, आयरन आदि मिनरल्स पाए जाते हैं।
कांडा क्षेत्र में केल का उत्पादन होना जिले के किसानों के लिए अच्छी खबर है। कपकोट, दुगनाकुरी, कौसानी आदि क्षेत्रों में भी इसकी अच्छी पैदावार हो सकती है। विभाग इन क्षेत्रों के किसानों को केल के उत्पादन के लिए जागरूक करेगा। किसान इससे अच्छी आय भी अर्जित कर सकते हैं।
आरके सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, बागेश्वर