प्राइमरी स्कूल छुरिया का खस्ताहाल भवन।
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राजकीय प्राइमरी विद्यालय छुरिया के भवन की छत पर लगे टिन, लकड़ी के तख्ते एवं बल्लियों के गल जाने से यह भवन अब बच्चों के बैठने के लायक नहीं रह गए हैं। आठ महीने पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भवन के लिए नौ लाख रुपये मंजूर किए थे, लेकिन भवन का पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। छत नहीं बनने से बच्चे खुले में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बरसात और गर्मी के मौसम में बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो जाती है।
प्राइमरी स्कूल छुरिया के भवन की छत खस्ता हाल हो गई है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भवन की छत के पुनर्निर्माण के लिए नौ लाख रुपये मंजूर किए थे। बजट मंजूर होते ही शिक्षा विभाग ने 16,500 रुपये में छत नीलाम कर दी। लेकिन, तब से छत का पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। पिछले सत्र में विद्यालय में 25 बच्चे पंजीकृत थे। छत नहीं बनने से इस सत्र में बच्चों की संख्या घटकर 16 हो गई है। अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने पिछले दिनों इस मुद्दे को तहसील दिवस में उठाया था।
डीएम के निर्देश के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है। इससे ग्रामीणों और अभिभावकों में रोष है। उन्होंने शिक्षा विभाग से स्कूल की छत का शीघ्र निर्माण करने की मांग की है। मांग करने वालों में ग्राम प्रधान हेमा देवी, सामाजिक कार्यकर्ता बसंत कुमार, महेश गढ़िया आदि शामिल हैं।
भवन निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था जिला पंचायत है। पंचायत ने निर्माण के लिए पिछले दिनों निविदाएं आमंत्रित की थीं, लेकिन संबंधित ठेकेदार ने काम शुरू नहीं किया है। जिपं को काम शीघ्र शुरू करने के लिए पत्र लिखा है।
- रमेश चंद्र मौर्य, खंड शिक्षा अधिकारी।