बागेश्वर। पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि जब तक स्थानीय लोगों को आपदा प्रबंधन में शामिल नहीं करेंगे तब तक कोई लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने ग्राम प्रधान, युवक और महिला मंगल दल व ग्राम चौकीदार को आपदा प्रबंधन का हिस्सा बनाने की बात कही। रावत ने आपदाग्रस्त क्षेत्रों में केंद्रीय मंत्री, दायित्वधारियों के नहीं आने पर निशाना साधा। कहा कि न तो मंत्री और ना ही घंत्री (दायित्वाधारी) आपदा प्रभावितों क्षेत्र में दिख रहे हैं।
नगर के एक होटल में पत्रकारों से पूर्व सीएम रावत ने कहा कि आपदा से निपटने के सरकार के पास कोई समन्वय नहीं है। कोई तात्कालिक लाभ या आश्वासन भी सरकार नहीं दे रही है। सीएम आपदा प्रभावितों के पास आते हैं और एक-दो आंसू पोंछकर चले जाते हैं। बाद में पीड़ितों के आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है।
आपदा के समय में भी भाजपा कुर्सी-कुर्सी के खेल में लगी है। केंद्रीय मंत्री आजकल खतरे से दूर हैं। उन्हें पता है कि यहां खतरा है इसलिए वह दूर हैं। सरकार फ्रंट से लीड नहीं कर पा रही है। अब समय है कि लोग सरकार कहां है की आवाज लगाकर इन्हें जगाने का काम करे।
रावत ने बताया कि प्रदेश में कई स्थानों पर छोटे अधिकारी आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनका मार्गदर्शन करने के लिए न उच्चाधिकारी हैं न ही विधायक या मंत्री वहां पहुंच रहे हैं। हमारे समय में सभी दायित्वधारियों को आपदा पीड़ितों के बीच में रहने की जिम्मेदारी दी गई थी।
कांग्रेस कार्यकर्ता हरसंभव मदद के लिए तत्पर रहते थे। सरकार को आपदा से निपटने के लिए तत्पर होना पड़ेगा। स्थानीय लोगों की भागीदारी को बढ़ाने की जरूरत है। ऐसा करने से रिस्पांस टाइम को कम किया जा सकेगा और नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।