बागेश्वर के जिला अस्पताल में बने प्रसवोत्तर कक्ष में लगे बैड। संवाद
बागेश्वर। जिला अस्पताल में प्रसव के बाद मां और नवजात शिशु की देखभाल करने के लिए अलग से प्रसवोत्तर कक्ष स्थापित किया गया है। इससे गर्भवती और नव माताओं को सुविधा मिलेगी। प्रसवोत्तर कक्ष में अभी केवल चार बेड का इंतजाम किया गया है जबकि प्रसवोत्तर कक्ष 20 बेड का बनना है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके टम्टा ने बताया कि 20 बेड अस्पताल में आ चुके हैं। तकनीशियन के आने का इंतजार है। जल्द ही प्रसवोत्तर कक्ष में 20 बेड लगवाए जाएंगे। अस्पताल में अब तक प्रसवोत्तर कक्ष की व्यवस्था नहीं थी। प्रसव उपरांत महिलाओं को गर्भवती के साथ एक ही वार्ड में रहना पड़ता था जिसकी वजह से कई बार गर्भवती को बेड मिलने में परेशानी होती थी।
क्या है प्रसवोत्तर कक्ष
बागेश्वर। प्रसवोत्तर कक्ष में प्रसव के बाद मां और नवजात शिशु की देखभाल की जाती है। प्रसवोत्तर कक्ष में रहने की अवधी कई कारकों पर निर्भर करती है। जैसे प्रसव का तरीका, मां और शिशु की स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल की नीतियां। आमतौर पर सामान्य प्रसव के बाद 48 घंटे और सिजेरियन यानी ऑपरेशन के बाद 72 से 96 घंटे तक मां और नवजात शिशु को अस्पताल में रहना पड़ता है।