बागेश्वर। 39 वर्ष से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रहे वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा की 10 वर्ष की मेहनत रंग लाई है। पौधरोपण करने और सफाई अभियान चलाने से नगर के मंडलसेरा के भुल्यूड़ा में स्थित भाना नौले में एक बार फिर जलधारा बह निकली है। इससे सैकड़ों परिवारों की पेयजल समस्या का समाधान हो सकेगा।
भुल्यूड़ा का भाना नौला या भवानी नौला प्राचीन समय से इलाके के लोगों की प्यास बुझाता था। इलाके के सैकड़ों परिवारों की प्यास बुझाने वाले नौले में करीब 10 वर्ष पहले पानी कम होने लगा था। नौले पर मंडराए संकट को देखते हुए वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा ने वर्ष 2013 में नौले को पुनर्जीवित करने के लिए नौले के आसपास सिलिंग प्रजाति के पौधे रोपे। सिलिंग को जलसंवर्धन में कारगर माना जाता है। ये पौधे अब पेड़ बन गए हैं।
गर्मियों में एक बूंद भी पानी नहीं टपका
पानी की कमी होने से स्थानीय लोगों ने नौले के पास टंकी बनाकर नल लगा दिए ताकि रात को टंकी भरे और लोगों को पानी मिलता रहे। कुछ वर्ष पहले आसपास रहने वाले लोगों के घरों में कुएं खुदने और नौले से 50 मीटर की दूरी पर जल संस्थान का हैंडपंप खुदने से नौले के पानी में और कमी आ गई। करीब तीन महीने पहले नौले का पानी बिल्कुल सूख गया। गर्मियों में नौले से एक बूंद पानी नहीं टपका।
अमर उजाला ने उठाया था मामला
अमर उजाला ने छह जून के अंक में भाना नौले में नहीं रहा पानी तो सूखने लगे हलक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद मलड़ा के नेतृत्व में नौले के आसपास सफाई की गई। स्वच्छता कार्य के बाद नौले में थोड़ा-थोड़ा पानी रिचार्ज होने लगा। हाल में हुई बारिश से नौला पूरी तरह रिचार्ज हो गया है। नौले में पानी काफी बढ़ गया है।