बागेश्वर। पलायन से खाली होते गांव, वीरान होती बाखलियों और बंजर होती उपजाऊ भूमि को बचाने की अनूठी पहल जिले के पोखरी गांव से होने जा रही है। आगामी 25 मई को गांव में पहला म्यूजिकल विलेज फेस्टिवल हो रहा है। कार्यक्रम में हल्द्वानी की आंटी, साइकिलिस्ट प्रदीप राणा समेत प्रदेश के कई प्रसिद्ध लोगों को आमंत्रित किया गया है।
विजयपुर ग्राम सभा के पोखरी गांव की आबादी दो दशक पहले तक 500 से अधिक थी। पलायन के कारण सिमटकर 150 रह गई है। वीरान होते गांव में फिर से बहार लाने के उद्देश्य से यूकेडी नेता वरुण चंदोला ने यह पहल शुरू की है। सड़क से लेकर गांव तक कई तोरण द्वार लगाए जा रहे हैं। वीरान घरों और बाखलियों समेत आबाद मकानों पर म्यूजिक की थीम वाले चित्र उकेरे गए हैं। प्रवेश सीमा से लेकर पूरे गांव तक रंग-बिरंगी पताका लगाई गई हैं। आयोजन में आसपास के गांवों को पलायन से बचा रहे लोगों को बुलाया गया है। आयोजक चंदोला ने बताया कि सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक कार्यक्रम चलेगा।
बाखलियों को मिले नए नाम, कुमाऊं वॉरियर्स, व्हाइट हाउस रखे नाम
गांव की बाखलियों को सजाने के साथ-साथ उनका नया नामकरण किया गया है। 121 साल पुरानी बाखली को व्हाइट हाउस तो सैनिक परिवार वाली बाखली को कुमाऊं वॉरियर्स नाम दिया गया है। चंदोला ने बताया कि कार्यक्रम में कई कलाकार भी आमंत्रित हैं। मंच से कला के प्रदर्शन के साथ-साथ वह अपने अनुभव भी साझा करेंगे। बताया कि कार्यक्रम के माध्यम गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की एक व्यापक परिकल्पना की है। वीरान होती बाखिलयों को होम स्टे के रूप में विकसित करने, ऑर्गेनिक खेती से तैयार भोजन को फार्म टू टेबल मॉडल के तहत पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए लोगों को प्रेरित करना है। अभियान को आगे राइटर विलेज, टेक्नोलॉजी विलेज के तहत जिले के अन्य गांवों से जोड़ा जाएगा तो युवाओं के लिए रोजगार के मौके बनेंगे।