बागेश्वर। कांडा तहसील का पोखरी गांव जिले के पहले म्यूजिकल विलेज फेस्टिवल का गवाह बना। पलायन की मार झेल रहे गांवों को खुशहाल बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल में लोक कलाकारों ने उम्मीद के रंग भरे। मंच से प्रस्तुत किए गए गीत, संगीत और नृत्य का दर्शकों ने जमकर लुत्फ उठाया। हल्द्वानी वाली आंटी ने अपने हास्य विनोद से मायके वालों को जमकर हंसाया।
म्यूजिकल विलेज फेस्ट के मुख्य अतिथि यूकेडी के युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी रहे। उन्होंने कहा कि पलायन से पहाड़ को बचाने के लिए आयोजक वरुण चंदोला की मुहिम सराहनीय है। एक पीढ़ी पहाड़ छोड़कर चली गई लेकिन दूसरी पीढ़ी उसे बचाने के लिए आगे आ रही है। यह बेहद सुखद पल है।
आयोजक वरुण चंदोला ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य गांव की खाली बाखलियों को होम स्टे के रूप में विकसित करना और युवाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना है। आयोजन के लिए गांव की पुरानी बाखलियों को संगीत और संस्कृति की थीम पर सजाया गया है। पुरानी बाखलियों को अलग-अलग नाम दिया गया है। कोशिश है कि जो लोग गांव छोड़कर चले गए हैं वह वापस लौटें। गांव की रीति-नीति को जानें और यहां के लोगों के साथ संवाद कर अपने अनुभव सांझा करें। इस मौके पर पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष कुलदीप रावत, जिलाध्यक्ष मनोज जोशी, जिपं सदस्य विजया कोरंगा, भाष्कर बोरा आदि मौजूद रहे।
शराबी पति और उनका बचाव करने वाली पत्नियों पर कसा तंज
फेस्टिवल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण हल्द्वानी वाली आंटी के नाम से मशहूर राशि जोशी रहीं। उन्होंने सांस्कृतिक मंच से अपने चिरपरिचित अंदाज में कुमाऊंनी लहजे में पिरोई गई हिंदी प्रस्तुत की तो दर्शक पंडाल में हास्य का पुट भर गया। इस दौरान उन्होंने नशे पर कटाक्ष किया। शराब पीकर घर में हंगामा करने वाले पतियों को लताड़ लगाई तो शराबी पति का समर्थन करने वाली पत्नियों को भी खरी-खरी सुनाई। युवाओं को रीलबाजी की बजाय अपनी शिक्षा और कॅरिअर पर ध्यान देने का संदेश भी दिया।
कलाकारों के साथ नेताओं का भी छलिया नृत्य
आयोजन में प्रसिद्ध लोक गायक पूरन सिंह राठौर, वायु खेतवाल, रविंद्र कुमार, दीपक चंदोला, बबलू, कवि, नवीन पाठक, अर्जुन खलपटिया, रितु लोहिया ने सुरों की महफिल सजाई। बागनाथ लोक कला मंच के कलाकारों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुति दी। बलवंत खेतवाल की टीम ने चांचरी प्रस्तुत की। छोलिया नर्तकों के साथ यूकेडी नेताओं ने भी जमकर डांस किया। मंच संचालन अजय चंदोला और मनोज चौहान ने किया। भूगर्भ रिसर्चर अचला जोशी की चित्रकला, पत्थर आर्ट और वुड आर्ट की प्रदर्शनी को देखने भी लोग उमड़े।
एक नजर पोखरी गांव पर
पोखरी गांव में करीब 70 मकान हैं जिनमें सात-आठ मकान पूरी तरह से खाली हैं। 700 की आबादी वाले गांव में वर्तमान में 150 परिवार बच गए हैं। 90 प्रतिशत लोगों के गांव से बाहर भी घर हैं। केवल 10 प्रतिशत आबादी के ही केवल गांव में मकान हैं। गांव की सबसे बड़ी समस्या पेयजल संकट है। 1999 में स्वजल से बनी पेयजल योजना में आठ किमी दूर से पानी आता है। यह योजना भी अक्सर क्षतिग्रस्त हो जाती है। गांव में रहने वालों में 80 प्रतिशत बुजुर्ग हैं। गांव तक पहुंचने के लिए 500 से 800 मीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है।