बागेश्वर। डिजिटल शिक्षा को नए स्तर पर ले जाने के लिए शुरू किए गए पीएम ई-विद्या चैनल अब खुद एक परीक्षा से गुजरने जा रहे हैं। एक साल पहले लॉन्च हुए इन पांच शैक्षिक चैनलों की असल प्रभावशीलता यह जानने के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) दिसंबर से शोध शुरू करने की तैयारी में है। सैंपलिंग के आधार पर पूरे प्रदेश का विश्लेषण होगा।
पीएम ई-विद्या चैनल्स की शुरुआत कोविड काल में 17 सितंबर 2020 को की गई थी। उत्तराखंड में नौ मार्च 2024 को पाँच अलग-अलग चैनलों का लोकार्पण किया गया। हालांकि चैनलों के माध्यम से ज्ञान की खिड़कियां तो खुलीं लेकिन तकनीकी अवसंरचना की कमी, कमजोर नेटवर्क, डिजिटल साक्षरता की कमी और शिक्षक-प्रशिक्षण जैसी समस्याएं इसे हर विद्यार्थी तक पहुंचने से रोक रही हैं।
अब डायट यह पता लगाएगा कि डिजिटल शिक्षा की यह बड़ी पहल जमीन पर कितनी सफल रही और इसे और प्रभावी बनाने के लिए क्या सुधार जरूरी हैं। जिले के हर स्कूल में जाकर शिक्षकों व विद्यार्थियों से चैनलों की उपयोगिता, पहुंच और वास्तविक लाभ के आंकड़े जुटाए जाएंगे। हर जिले की रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसी मॉडल पर पूरे प्रदेश में सैंपलिंग के आधार पर विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
प्रदेश में ये चैनल चल रहे
उत्तराखंड में फुलदेई, बालगंगा, उत्तरायणी, मोनाल और ब्रह्मकमल नाम से पांच पीएम ई-विद्या चैनल प्रसारित होते हैं। इनका संचालन एसीईआरटी करती है। कक्षा 1 से 12 तक के विषय चयनित शिक्षकों द्वारा 30-30 मिनट की मॉड्यूल में प्रस्तुत किए जाते हैं। एक विषय दो से तीन घंटे के चक्र में चलता रहता है ताकि बच्चे अपनी सुविधा अनुसार इसे बार-बार देख सकें। इन चैनलों को डिश टीवी के माध्यम से एमपीईजी-4 सेट-टॉप बॉक्स पर देखा जा सकता है। इसके अलावा वीडियो दीक्षा पोर्टल और यूट्यूब पर भी उपलब्ध हैं।
शोध का उद्देश्य: डिजिटल शिक्षा की असल तस्वीर
डायट बागेश्वर के अनुसार इस शोध में पीएम ई-विद्या की संरचना और उद्देश्यों का विश्लेषण, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म के रूप में इसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन, क्रियान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों की पहचान, शिक्षकों और विद्यार्थियों के अनुभवों का अध्ययन शामिल होगा। अध्ययन के आधार पर कार्यक्रम को और बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए जाएंगे।
कोट
कोटपीएम ई-विद्या एक प्रभावी ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म बन सकता है। इसके लिए डिजिटल अवसंरचना और डिजिटल साक्षरता को मजबूत करना बेहद जरूरी है। शोध इन्हीं मुद्दों की वास्तविक स्थिति सामने लाएगा। -कैलाश प्रकाश चन्दोला, डायट प्रवक्ता, बागेश्वर
यह अध्ययन डिजिटल शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नीति-निर्माताओं और शिक्षा जगत के लिए दिशा-निर्देशक साबित होगा। यह एनईपी के डिजिटल-सशक्त भारत लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा। -चक्षुष्पति अवस्थी, प्राचार्य, डायट बागेश्वर