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जंगलों और सड़क के किनारे बिखरा है जंगलों की आग का सामान

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बागेश्वर। मौसम में एक बार फिर तब्दीली आने लगी है। लगातार 13 दिन तक बारिश होने के बाद शुक्रवार को बारिश का सिलसिला थमा। बारिश से जंगलों में आग लगने का सिलसिला भी रुक गया है लेकिन जंगल और सड़क किनारे बिखरा पिरूल जंगलों में दोबारा आग का कारण बन सकता है।
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वन विभाग 15 फरवरी से 14 जून तक अग्निकाल मानकर जरूरी उपाय करता है। जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए नियंत्रित फुंकान करता है। जंगलों में नाली भी बनाई जाती है। पिरूल को वन कर्मियों की देखरेख में जलाया जाता है, ताकि अग्निकाल में जंगलों में आग न लगे लेकिन इस बार सड़क किनारों से पिरूल नहीं हटाया जा सका है।
यही कारण है कि जंगलों में हर तरफ पिरूल बिखरा पड़ा है। यह नजारा कपकोट-शामा, बागेश्वर-अमसरकोट-गिरेछीना, बागेश्वर-कांडा सड़क से सटे क्षेत्रों में देखा जा सकता है। ऐसे में तापमान बढ़ने पर जंगलों में आग लगने की घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने भी वन विभाग से आबादी और जंगल किनारे पिरूल हटाने की मांग की है।
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अभी नया पिरूल भी गिरा है। बारिश के कारण इन दिनों मौसम में नमी बनी हुई है। मौसम साफ होने पर पिरूल को हटाया जाएगा। जंगलों को आग से बचाव के लिए हर जरूरी उपाय किए जाएंगे।
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- मनीष कुमार, वन क्षेत्राधिकारी, बागेश्वर रेंज।
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