बागेश्वर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए प्रचार जोरशोर से चल रहा है। प्रत्याशी गांव-गांव जाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मतदाता भी प्रत्याशियोंं के आगे समस्याओं का लंबा-चौड़ा चिट्ठा प्रस्तुत कर उन्हें पूरा कराने का वादा ले रहे हैं। जिले के तीनों विकासखंडों में जंगली सुअर और बंदरों की समस्या प्रमुखता से देखने को मिल रही है।
जिले में नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बंदर प्रमुख समस्या बन गए है। किसानों का कहना है कि दिन में बंदरों का झुंड और रात को जंगली सुअरों का फसल, सब्जी, फलों को चौपट कर रहे हैं। विधानसभा, लोकसभा चुनाव के अब पंचायत चुनाव प्रत्याशियों के सामने भी यह समस्या प्रमुखता से उठ रही है।
किसानों की एक बड़ी समस्या सिंचाई नहरों के खस्ताहाल या बंद होना भी है। गरुड़, कपकोट, दुगनाकुरी क्षेत्र के प्रत्याशियों के सामने यह समस्या अधिक उठ रही है। बाकी गांवों में कच्चे पैदल रास्तों को पक्का बनाने, नए रास्तों का निर्माण कराने, सुरक्षा दीवारों का निर्माण, प्राकृतिक स्रोतों के जीर्णोद्धार आदि मुद्दे उठाए जा रहे हैं। कुछ महिला जिपं प्रत्याशियों ने नशे के बढ़ते प्रचलन को रोकना भी अपनी प्राथमिकता में रखा है।
कोट-
जंगली सुअर और बंदर खेती के दुश्मन बन गए हैं। जैसे ही फसल बढ़ने लगती है जंगली सुअर आकर चौपट कर देते हैं। कुछ बच गया तो बीज लगने के बाद बंदर उजाड़ रहे हैं। किसान को लागत से अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। चुनाव में नेता आकर वादा तो कर जाते हैं, लेकिन समस्या के निदान के लिए ठोस नीति नहीं बन सकी है। - शंकर करायत, कराला पालड़ी,
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जंगली सुअर और बंदर खेतीबाड़ी चौपट कर रहे हैं। एक समय था जब बाजार से सब्जी खरीदनी नहीं पड़ती थी। अब घर की सब्जी देखना भी मुश्किल होता जा रहा है। किसानों की सबसे बड़ी समस्या बन चुके इन जानवरों से निजात दिलाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की जरूरत है। - रमेश सिंह, किसान, गरुड़