फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बागेश्वर के सीमा में बसे दशौली में था इंदिरा हृदयेश का मायका

विज्ञापन
विज्ञापन
बागेश्वर/कौसानी। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन से बागेश्वर के कांग्रेसियों के साथ ही अन्य लोग भी दुखी हैं। नेता प्रतिपक्ष का गांव दशौली जिले की सीमा में होने के कारण भी लोगों का उनसे लगाव रहा है।
विज्ञापन

इंदिरा हृदयेश को जिले के लोग यूपी काल में जब वह शिक्षक कोटे से एमएलसी हुआ करतीं थी, तब से जानते हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष लोकमणि पाठक ने इंदिरा हृदयेश के निधन को पूरे प्रदेश के लिए गहरी क्षति बताते हुए कहा कि वह राजनीति की मर्मज्ञ थीं। कहा कि वह कई बार बागेश्वर के भ्रमण पर आईं। कौसानी भी उनका आना-जाना लगा रहता था। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पाठक स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश के मायके दशौली के ही रहने वाले हैं।
बताते हैं कि इंदिरा हृदयेश का गांव से लगाव रहा है। वह कोटगाड़ी के मंदिर भी आती रहती थीं। बताते हैं कि राज्य गठन के बाद इंदिरा हृदयेश डीडीहाट को भी अपनी राजनीतिक कर्मस्थली बनाना चाहतीं थीं। उन्होंने वर्ष 2000 में डीडीहाट में राजनी तिक संभावनाएं भी टटोली थीं लेकिन राजनीतिक कर्मभूमि हल्द्वानी को बनाया।
विज्ञापन

कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने उनके साथ विधानसभा में बिताए गए क्षनणों को याद करते हुए कहा कि वह विधाई कार्य भी अच्छी जानकार थीं। उनका निधन कांग्रेस ही नहीं राज्य के लिए अपूर्णीय क्षति है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी, पूर्व दर्जा मंत्री राजेंद्र टंगड़िया, उद्योग व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष बबलू नेगी, पूर्व पालिकाध्यक्ष गीता रावल, महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव इंदिरा जोशी, कांग्रेस नेत्री सुनीता टम्टा, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष कवि जोशी, यूथ कांग्रेस के जिला प्रवक्ता अंकुर उपाध्याय ने कहा कि इंदिरा एक मुखर नेता थीं। उनकी कमी हमेशा खलेगी। तमाम कांग्रेसियों ने नेता प्रतिपक्ष के निधन पर दुख प्रकट किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें