वनाग्नि सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि वनों को आग से बचाने के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है। वनाग्नि से वनस्पति को नुकसान पहुंचता है। जंगली जानवरों के जीवन को खतरा बना रहता है।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई इस बैठक में डीएम ने कहा कि वन हमारे जीवन के लिए काफी उपयोगी हैं। ग्राम स्तर पर भी लोगों को जागरूक होकर जंगलों को आग से बचाने के में अपनी अहम भूमिका निभानी चाहिए। कहा कि प्रभागीय वनाधिकारी को गांव में युवक एवं महिला मंगल दलों, वन पंचायत सरपंचों और ग्राम पंचायतों की बैठकें बुलाकर उन्हें वनाग्नि के दुष्प्रभावों के बारे में बताएं। उन्हें वनाग्नि को रोकने के लिए प्रेरित करें। इस मौके पर वनों की सुरक्षा के लिए कार्ययोजना तैयार करने के भी निर्देश दिए।
प्रभागीय वनाधिकारी एमबी सिंह ने ग्रीष्मकालीन वनाग्नि के कारण, दुष्प्रभाव और अग्नि प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि अधिकांश वनाग्नि की घटनाएं जान बूझकर आग लगाने से होती हैं। सरपंच संगठन के सचिव नरेंद्र परिहार, किशन दानू और वृक्ष प्रेमी किशन मलडा ने वनाग्नि से बचाव के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। किशन दानू ने कहा कि वनाग्नि को रोकने के लिए ग्रामीण स्तर के स्कूलों के माध्यम से वृहद प्रचार प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। इस मौके पर सीडीओ एसएसएस पांगती, उप प्रभागीय वनाधिकारी सत्येंद्र नाथ त्रिपाठी, एसीएमओ जेसी मंडल, पीएमजीएसवाई के ईई राजेंद्र प्रसाद आदि मौजूद थे।