बागेश्वर। उच्च न्यायालय ने जिले में खड़िया खानों को बंद करने का आदेश देकर खनन के दुष्परिणाम झेल रहे लोगों को बड़ी राहत प्रदान की है। लंबे समय से जल, जंगल, जमीन को बचाने की बात करने वालों के चेहरों पर भी खनन पर रोक लगने से खुशी के भाव है। वहीं खनन के कारण मकान छोड़ने को मजबूर हुए लोग भी निर्णय से संतुष्ट हैं।
जिले में खड़िया खनन क्षेत्र का लगातार विस्तार हो रहा था। दुगनाकुरी तहसील के कई गांवों में खड़िया की खानें हैं। कांडा-कमस्यार, पुंगरघाटी, दफौट क्षेत्र के बाद आपदा की दृष्टि से संवेदनशील कपकोट तहसील क्षेत्र में खनन की सुगबुगाहट समय-समय पर सुनने को मिलती है। खनन का सबसे अधिक असर कांडे कन्याल गांव पर दिखाई देता है। कांडा पड़ाव का कालिका मंदिर से लेकर गांव के मकानों तक कई स्थान पर खनन के दंश दिखाई देते हैं। कभी अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए रंगीली नाकुरी के नाम से पहचानी जाने वाली नाकुरी पट्टी को जगह-जगह लगे खनन के घावों ने बदरंग कर दिया। दफौट, कांडा और दुग नाकुरी क्षेत्र में खनन का बढ़ता दायरा प्रकृति पर लगातार चोट कर रहा था।
खनन रुकेगा, तभी पहाड़ बचेगा
बागेश्वर। लंबे समय से खनन का विरोध कर रहे अधिवक्ता गोविंद सिंह भंंडारी कहते हैं कि उच्च न्यायालय के आदेश से जिले को नया जीवन मिलेगा। खनन ने गांव के गांव बर्बाद कर दिए। लोगों की जमीन, प्राकृतिक जलस्रोत, मंदिर यहां तक कि उपजाऊ जमीन भी खनन की भेंट चढ़ा दिए गए। आबादी के बीच धड़ल्ले से हो रहे खनन ने कई लोगों को पलायन करने पर मजबूर कर दिया। कोर्ट का निर्णय खनन के प्रभावितों के लिए संजीवनी की तरह है। सवाल संगठन के अध्यक्ष रमेश पांडेय कृषक कहते हैं कि खनन बंद होने से जलागम सुरक्षित होगा। हमारे गौचर, पनघट, नदियां, बरसाती नाले सुरक्षित होंगे। कॉरपोरेट अपने साथ जो विकृतियां लेकर आते हैं, उनसे भी निजात मिलेगी। जिले में खनन से लगातार कम होती जा रही कृषि भूमि बचेगी। उच्च न्यायालय को साधुवाद, निर्णाय से खनन प्रभावितों को राहत मिलेगी।
पिछले साल 27 करोड़ का मिला राजस्व
बागेश्वर। खड़िया खनन जिले का सबसे अधिक राजस्व देने वालों में एक है। खान विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 168 खड़िया खान स्वीकृत हैं। वर्तमान में 50 खानों का संचालन हो रहा था। वित्तीय वर्ष 2023-24 में खनन से 27.04 करोड़ और वर्ष 2022-23 में 30.99 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। खनन कारोबार से 10 हजार से अधिक लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े हैं।
कोर्ट कमिश्नर की टीम ने किया था निरीक्षण
बागेश्वर। कांडे-कन्याल गांव में खनन से मकानों को हो रहे नुकसान का मामला सामने आने के बाद उच्च न्यायालय से नियुक्त कोर्ट कमिश्नरों ने विगत 14 और 15 दिसंबर को कांडा के कांडे कन्याल, सेरी समेत पुंगरघाटी, दुगनाकुरी तहसील क्षेत्र की खड़िया खानों का निरीक्षण किया था। कोर्ट कमिश्नर ने गांवों में जाकर लोगों का दर्द सुना। खनन से उनके घरों, रास्तों और खेतों को हो रहे नुकसान का स्थलीय जायजा लिया था। अमर उजाला ने इन गांवों में खनन से होने वाली दुश्वारियों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।