धौलछीना(अल्मोड़ा)। जिले के दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं खस्ता हालत में पहुंच गई हैं। हालत इतनी खराब है कि दूरदराज के क्षेत्रों में खोले गए अस्पतालों में प्राथमिक चिकित्सा भी बड़ी मुश्किल से होती है। ऐसे में यह अस्पताल महज रेफर सेंटरों में तब्दील होकर रह गए हैं। लेकिन स्वास्थ्य महकमा इन अस्पतालों की हालत सुधारने के लिए कोई कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझ रहा है।
जिले के भैंसियाछाना विकास खंड की बात करें तो यह क्षेत्र अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिले का सीमावर्ती क्षेत्र है। सीमांत क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके इसके लिए सेराघाट में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोला गया है। लेकिन यहां सुविधाएं नाम मात्र की है। इस अस्पताल में अगर कोई प्रसव पीड़िता भर्ती हो जाए तो संसाधनों के अभाव में उसे यहां से रेफर करना चिकित्सकों की मजबूरी बन जाती है। अस्पताल में एक्सरे समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं हैं। कभी कोई सड़क हादसा हो जाए तो उसके प्रभावितों को बमुश्किल प्राथमिक उपचार देकर यहां से रेफर कर दिया जाता है।
अस्पताल को जाने वाली सड़क भी लंबे समय से खस्ता हालत में है लेकिन उसका आज तक निर्माण नहीं हो पाया है। हालत यह है कि अस्पताल मार्ग पर वाहन चढ़ाना लोगों के लिए टेड़ी खीर साबित हो रहा है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों के यह अस्पताल अपने उद्देश्य को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। लेकिन महकमा अस्पताल की सुध लेने को तैयार नहीं है।
स्याल्दे में दस दिन से लावारिस खड़ी है 108 एंबुलेंस
मौलेखाल (अल्मोड़ा )। जिले के स्याल्दे विकास खंड में भी स्वास्थ्य सेवाओं का हाल काफी बुरा हाल है। रोगियों को उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए यहां एक 108 एंबुलेंस तैनात तो की गई है। लेकिन वह पिछले दस दिनों से खराब होकर सड़क किनारे लावारिस हालत में खड़ी है। मजबूरी में तीमारदार रोगियों को महंगी टैक्सी हायर कर जैसे तैसे अस्पताल पहुंचा रहे हैं।
कोट-ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। सभी चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए गए कि रोगियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। -डाॅ.आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा