बागेश्वर। पंडित बीडी पांडे परिसर में आवासों की स्थिति दयनीय हो गई है। प्राचार्य आवास में कॉलेज के समय से ताला लगा हुआ है। परिसर में पांच आवासीय भवन है। इसमें से दो प्राध्यापकों और तीन कर्मचारियों के लिए अधिकृत है। इन भवनों में 17 क्वार्टर हैं। वर्तमान में मात्र चार क्वार्टरों का उपयोग हो रहा है।
बीते सप्ताह में एकमात्र रसायन विज्ञान के प्राध्यापक क्वार्टर में रहा करते थे लेकिन उनका स्थानांतरण होने से आवास में प्राध्यापकों की संख्या शून्य हो गई है। वर्तमान में परिसर में 33 प्राध्यापक तैनात हैं। इनमें से एक भी परिसर आवास में नहीं रहते हैं। परिसर में उचित आवास की सुविधा न होने से वह बाहर किराये पर कमरा लेकर रहते है।
एक क्वार्टर में हैं ये सुविधाएं
बागेश्वर। परिसर आवास के प्रत्येक क्वार्टर में दो से तीन कमरे, एक हॉल, एक किचन, एक शौचालय और एक स्नानघर बना है। प्रथम तल में बालकनी है। छत पुराने समय की है। छत पर टिन और लकड़ियों का काम हुआ है। बिजली के लिए कर्मचारी को निजी कनेक्शन लेने पड़ते है। वाहन पार्किंग के लिए व्यवस्थित स्थान नहीं है।
नलों में पानी नहीं, भवनों की छतें टपक रहीं
बागेश्वर। परिसर के क्वार्टरों में लगे नलों में पानी नहीं आता है। परिसर के हैंडपंप से कर्मचारी पानी भरते हैं। शौचालयों के दरवाजे और चौखट जर्जर हालत में है। सीलन से कहीं छत का प्लास्टर उखड़ा गया है। तो कहीं छतों से पानी टपक रहा है। कमरों में फर्श जगह-जगह टूटे हुए है। कई खिड़कियों में दरवाजे नहीं मात्र जालियां लगी हुई हैं। बिजली के तार व्यवस्थित नहीं हैं। आवास को जाने वाला रास्ता भी बदहाल है। सुरक्षा दीवार में दरार आई है। दीवार के ऊपरी हिस्से में टूट फूट हुई है।
झाड़ियां और घास का अंबार
बागेश्वर। आवासीय भवनों को चारों तरफ घास और कटीली झाड़ियों ने घेरा है। भवन की दीवारों पर बेल चढ़ी हुई है। मानसून काल में इन झाड़ियों में कीटों के पनपने का डर बना रहता है।
शुल्क तो कटता है लेकिन नहीं मिलतीं सुविधाएं
बागेश्वर। इन भवनों में रहने का शुल्क भी कटता है। प्राध्यापकों से 5000 रुपये और कर्मचारियों से 3000 रुपये तक का भवन भत्ता लिया जाता है। शुल्क लेने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जाती है।
परिसर आवासों के जीर्णोद्धार के लिए उच्चाधिकारियों से बजट की मांग की जाएगी। बजट प्राप्त होने पर सुधारीकरण का कार्य किया जाएगा। -डॉ. दीपा कुमारी, निदेशक परिसर बागेश्वर।