कपकोट (बागेश्वर)। देश में भले ही बुलेट ट्रेन चलाने की बातें हो रही हों लेकिन जिले के कई गांव आज भी वाहन सुविधा से वंचित हैं।
कर्मी के सापुली गांव तक मार्ग नहीं होने से बीमार, गर्भवती और बुजुर्गों को सड़क तक लाने के लिए डोली का सहारा लेना पड़ता है। सड़क तक आने के लिए पक्का पैदल रास्ता भी नहीं बना है। इसके चलते डोली उठाकर चलने में जोखिम बना रहता है।
बीते दिवस एक गर्भवती को ग्रामीण डोली के सहारे सड़क तक लाए। कर्मी गांव के सापुली तोक में 55 परिवार निवास करते हैं। बुधवार की शाम को गर्भवती हेमा देवी (30) पत्नी मनीष सिंह को प्रसव पीड़ा होने लगी।
गांव से सड़क तक पैदल चलकर आने की स्थिति नहीं थी। ग्रामीण रघुवर सिंह, हुकुम सिंह, कुंदन सिंह, उमराव सिंह, केशर सिंह, और नरेंद्र सिंह महिला को डोली में बैठाकर सड़क तक लाए।
ग्रामीणों ने बताया कि पैदल चलने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। छोटी सी पगडंडी, चढ़ाई और ढलान, ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर पैदल चलने में ही दिक्कत होती है। डोली में लोगों को बैठाकर लाने में अधिक परेशानी होती है।
करीब आधा घंटे के बाद महिला को सड़क तक पहुंचाया गया। यहां से निजी वाहन से महिला को सीएचसी कपकोट लाए। अस्पताल में महिला का सामान्य प्रसव कराया गया। गांव की आशा कार्यकर्ता आनंदी देवी प्रसव पीड़िता के साथ अस्पताल आईं। उन्होंने बताया कि महिला और नवजात दोनों स्वस्थ हैं।