बागेश्वर। जिला अस्पताल में किडनी रोगियों के उपचार की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट का एक पद सृजित होने के बावजूद किडनी से जुड़े रोगों की जांच के लिए लोगों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
हंस फाउंडेशन की ओर से अस्पताल परिसर में डायलिसिस सेंटर का संचालन किया जा रहा है। यहां भी सुविधा पाने के लिए इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में 22 लोग डायलिसिस का लाभ उठाने के लिए इंतजार कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र में 35 मरीजों को डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है। बीते सितंबर तक केंद्र में केवल तीन बेड थे।
मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए तीन अक्तूबर को केंद्र में तीन नए बेड लगाए गए थे। एक मरीज के डायलिसिस में चार घंटे लगते हैं। एक दिन में केवल बारह मरीजों को ही सुविधा मिल पाती है। स्वास्थ्य सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण किडनी के मरीज अन्य जिलों के अस्पतालों से जांच और उपचार करवा रहे हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने से केंद्र में तैनात चिकित्सक रिपोर्ट और खून की जांच के बाद मरीज का नाम प्रतीक्षा सूची में शामिल करने के लिए मजबूर हैं।
सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि अक्तूबर माह में केंद्र में तीन नई मशीनें लगाई गईं हैं। सभी मरीजों को डायलिसिस की सेवा देने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों के रिक्त पदों की