बागेश्वर। बागेश्वर-ताकुला मार्ग पर बना प्राकृतिक जलस्रोत मांगधारा आज भी यात्रियों और राहगीरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। नगरपालिका के सैंज, बड़ेत, बिलौना आदि के लोग भी गर्मियों में पीने के लिए इसी स्रोत के पानी पर निर्भर रहते हैं।
एक समय में लोग प्राकृतिक स्रोतों के शीतल जल पर ही निर्भर थे। फ्रिज के पानी की बजाय प्राकृतिक स्रोत का जल अधिक शीतलता के साथ-साथ संतुष्टि भी प्रदान करता है। हालांकि वर्तमान में कई जलस्रोत उपेक्षा के कारण सूखते जा रहे हैं लेकिन मांगधारा कई दशकों से लोगों की प्यास बुझा रहा है। सड़क किनारे बने इस धारे पर पूरे दिन वाहन चालक और यात्री बोतल से पानी भरते हुए देखे जा सकते हैं। नगर के व्यापारी भी दोपहिया वाहन लेकर रोजाना धारे से पानी लेकर आते हैं। ज्वालादेवी, नारायणदेव और बिलौना वार्ड के कई लोग सुबह और शाम पीने के लिए इसी स्रोत से पानी लेकर आते हैं। गर्मियों के दिनों में सुबह-शाम धारे पर काफी भीड़ रहती है।
मांगधारे की महत्ता को देखते हुए नगरपालिका ने धारे के संरक्षण के लिए भी कार्य कराया है। धारे को गंदगी और नुकसान से बचाने के लिए जलस्रोत के पास देवी-देवताओं के चित्र बनाए गए हैं। आस्था और शीतलता के चलते लोग भी धारे को स्वच्छ बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं।
मांगधारा नगर का प्रमुख प्राकृतिक जलस्रोत है। नगरपालिका ने करीब डेढ़ साल पहले 1.80 लाख रुपये से धारे के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ लोगों के बैठने का भी इंतजाम कराया था। धारे को संरक्षित करने के लिए समय-समय पर पालिका की ओर से धारे में स्वच्छता अभियान भी चलाया जाता है।
हयात सिंह परिहार, ईओ नगरपालिका, बागेश्वर