बागेश्वर। जिला बनने के 26 साल बीतने को हैं, लेकिन अब तक बागेश्वर के खिलाड़ियों को एक अदद स्टेडियम नसीब नहीं हुआ है। खेल स्टेडियम न होने से बालक और बालिका छात्रावास भी संचालित नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि जिला मुख्यालय पर स्टेडियम स्वीकृत है। डीपीआर तैयार हो रही है।
आगामी 15 सितंबर को जिला गठन को 26 साल पूरे हो जाएंगे। इस अवधि में जिला मुख्यालय में खेल स्टटेडियम नहीं बन पाया। वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बागेश्वर में खेल स्टेडियम बनाने की घोषणा की थी। सीएम की घोषणा के अनुरूप जिला मुख्यालय के खोली में जमीन चयनित की गई। जमीन का काफी हिस्सा वन भूमि का था। वन भूमि का निस्तारण न होने से स्टेडियम का मामला लटक गया। दिवंगत मंत्री चंदन राम दास के प्रयासों से वर्ष 2022 में खेल स्टेडियम के लिए प्रस्तावित जमीन वन मुक्त हुई। सरकार ने डीपीआर तैयार करने और प्रारंभिक कार्यों के लिए 38 लाख रुपये की रकम मंजूर की। क्षतिपूरक पौधारोपण का बजट वन विभाग को दिया जा चुका है। स्टेडियम की डीपीआर तैयार हो रही है।
खेल स्टेडियम न होने से अब तक बालिका और बालिका छात्रावास अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं। खेल विभाग के साथ ही खिलाड़ी खेल गतिविधियों के लिए डिग्री काॅलेज के खेल मैदान पर निर्भर हैं। देर-सबेर खेल स्टेडियम का निर्माण होने की उम्मीद अब अवश्य जागी है। इधर, प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी गुंजन बाला का कहना है कि स्टेडियम की डीपीआर तैयार हो रही है। डीपीआर बनने के बाद स्टेडियम के लिए बजट अवमुक्त हो जाएगा।
हरीनगरी और अमस्यारी में फिर दिखा ग्रामीणों को तेंदुआ
गरुड़ (बागेश्वर)। वन प्रभाग बागेश्वर के गढ़खेत और बैजनाथ रेंज के ग्रामीण तेंदुए के आतंक से भयभीत हैं। अमस्यारी और हरीनगरी के ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए का शीघ्र पिंजरे में कैद करने की मांग की है।
भिलकोट, गूंगा, नौगांव, अमस्यारी, टिटोली, बूंगा, स्याली, भोलाथल, मवई के ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए ने कई दिनों से आबादी में डेरा डाला है जबकि ग्रामीण तेंदुए को कई बार आबादी से दूर भगा चुके हैं। सहमे ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में पिंजरा लगाने की मांग की है। तेंदुए ने कुछ दिन पूर्व भिलकोट गांव की एक किशोरी को हमला कर घायल कर दिया था। संवाद