बागेश्वर। प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए कई बार आदेश दिए। कार्रवाई करने तक की चेतावनी दे डाली, लेकिन जिले की शामा-गोगिना-कीमू सड़क पर इस आदेश का कोई असर नहीं हुआ। करीब 29 किमी की सड़क पर उखड़ा डामर और कई गड्ढे सैलानियों और स्थानीय लोगों की रोज परीक्षा लेते हैं।
शामा से करीब तीन किमी आगे जड़विला तक सड़क अच्छी है लेकिन यहां से आगे का सफर डरावना है। सड़क पर कहीं-कहीं डामर के अंश भर दिखते हैं। बाकी सड़क पर कहीं रोखड़, कहीं मिट्टी और कहीं पर खडंजा जैसी स्थितियां यात्रियों की परीक्षा लेती रहती हैं। इस सड़क से रोजाना लीती, रातिरकेटी, हांप्टीकापड़ी, गोगिना, कीमू आदि गांवों के लोग सफर करते हैं। स्वास्थ्य जांच कराने और घरेलू उपयोग की सामग्री लेने के लिए लोगों को शामा बाजार आना पड़ता है। इस दौरान उतार-चढ़ाव से भरी सड़क पर आवाजाही करना लोगों के लिए परेशानी से कम नहीं है।
आठ-दस साल से सड़क की हालत इसी तरह की बनी हुई है। बदहाल सड़क को लेकर बार-बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी हालात नहीं सुधर रहे हैं। कई बार देहरादून जाकर भी फरियाद कर चुका हूं। न तो जनप्रतिनिधि न प्रशासन मामले को लेकर गंभीर है। क्षेत्रवासी भगवान भरोसे खतरनाक सड़क पर सफर करने को मजबूर हैं।
प्रवीण सिंह रौतेला, पूर्व ग्राम प्रधान, गोगिना
सड़क से जुड़ने के बाद भी क्षेत्रवासियों को बेहतर सुविधा नहीं मिल रही है। गड्ढों से पटी सड़क पर यात्रा करना कष्टकारक है और खतरनाक भी। किसी के बीमार होने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाने में ही घंटों लग जाते हैं। सरकार और प्रशासन को सीमांग गांवों में रहने वालों की सुध भी लेनी चाहिए।
प्रकाश सिंह रौतेला, पूर्व ग्राम प्रधान, कीमू
शामा-गोगिना-कीमू सड़क की डीएलपी जून में समाप्त हो गई है। सड़क लोनिवि को हैंडओवर होनी है लेकिन अब तक इसकी कार्यवाही नहीं हुई है। फिलहाल विभाग की ओर से सड़क के लिए 2.75 करोड़ का आगणन बनाकर शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही सड़क में डामरीकरण कराया जाएगा।
अंबरीश रावत, ईई, पीएमजीएसवाई कपकोट