बागेश्वर। जिला अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर (ओटी) के नवीनीकरण का काम तय समय से पूरा नहीं हो सका है। इसका खामियाजा मोतियाबिंद के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीजों को ऑपरेशन के लिए जिले से बाहर के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। सालाना लक्ष्य के सापेक्ष इस साल मात्र 141 ऑपरेशन ही हो सके।
जिले में सरकारी अस्पताल और दो एनजीओ के माध्यम से मोतियाबिंद की जांच और ऑपरेशन किए जाते हैं। एक एनजीओ अपने आई ओटी में मरीजों के ऑपरेशन करता है जबकि दूसरे एनजीओ से चयनित मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन जिला अस्पताल में ही होते हैं। जून से जिला अस्पताल की ओटी बंद है। यह काम सितंबर तक पूरा होना था लेकिन नवंबर के दूसरे पखवाड़े तक भी काम पूरा नहीं हो सका है। ओटी में चल रहे निर्माण कार्य के कारण जिला अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं।
इस वर्ष अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग को 500 मोतियाबिंद के ऑपरेशन सरकारी स्तर पर करने हैं जबकि एनजीओ के माध्यम से 1,000 ऑपरेशन करने का लक्ष्य मिला है। इसके सापेक्ष जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के मात्र 17 सरकारी ऑपरेशन हो सके जबकि एक एनजीओ ने अपने ओटी में 124 ऑपरेशन किए हैं।
अपनी ओटी न होने के कारण दूसरे एनजीओ के माध्यम से चयनित मरीजों को भी स्क्रीनिंग के बाद ओटी खुलने तक इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। जिला अस्पताल और एनजीओ की मदद से आंखों की जांच के बाद ऑपरेशन के प्रतीक्षारत मरीजों की संख्या 135 हो गई है।
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी त्रिपाठी ने बताया कि ओटी बंद होने के कारण स्क्रीनिंग करा चुके अधिकतर मरीज बाहरी जिले के अस्पतालों में जाकर ऑपरेशन करा रहे हैं। प्रतीक्षारत मरीजों का ऑपरेशन ओटी खुलने के बाद ही हो सकेगा।
अंधता निवारण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी और एसीएमओ डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि ओटी के निर्माण में हो रही देरी से ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं और विभाग को मिले लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्धि भी काफी कम है। यदि ओटी जल्द नहीं खुला तो मरीजों को अधिक परेशानी उठानी पड़ेगी।
जिला अस्पताल में नवीनीकरण और सुधारीकरण का काम तेजी से चल रहा है। दीपावली की व्यस्तता के कारण कुछ विलंब हुआ है। दिसंबर में ओटी का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। - डॉ. वीके टम्टा, सीएमएस, जिला अस्पताल, बागेश्वर।