बागेश्वर। सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने पुलिस से मारपीट के मामले में निचली अदालत के आरोपियों को दोषमुक्त करने के आदेश को बरकरार रखा और मामले में राज्य सरकार की ओर से दाखिल की गई अपील को खारिज किया।
कथानक के अनुसार वादी एसआई लोकेश रावत ने 31 मई 2020 को जुबानी तहरीर देकर गासी निवासी मंगल राम, देवेंद्र राम और विरेंद्र राम पर थाने आकर उनके, थानाध्यक्ष और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करने और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया था। तहरीर के अनुसार तीनों के खिलाफ गांसी गांव के चामू राम पुत्र शोबन राम ने मारपीट की तहरीर दी थी। तहरीर देने के कुछ समय बाद तीनों आरोपियों ने थाने आकर पुलिस कर्मचारियों के साथ मारपीट की। लोहे की धातु से हमला किया और दस्तावेज फाड़ दिए। तीनों के खिलाफ धारा 186, 332, 253 और 504 के तहत केस दर्ज किया गया। विवेचना के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किए गए।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पत्रावली का परिसीलन करने के बाद पाया कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कराया गया और थाने में सीसीटीवी होने का जिक्र है लेकिन फुटेज प्रस्तुत नहीं की गई। उन्होंने संदेह के आधार पर 31 मई 2023 को आरोपियों को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया। फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की गई। सत्र न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता हरीश चंद्र जोशी, हरीश चंद्र आर्या, तुलसी जोशी और दिग्विजय सिंह जनौटी ने मामले की पैरवी की।