फूलों से हम हंसना सीखें, भवरों से गाना... इस कविता को अपने जीवन में उतारा है। ठाकुरद्वारा निवासी अवकाश प्राप्त शिक्षक गणेेेश दत्त पांडे ने। उनके लिए तो मानो फूल ही सब कुछ हैं। राह चलते किसी ने बगैर पूछे बगीचे से एक फूल तोड़ दिया उन्हें बेहद कष्ट होता है।
मूल रूप से बांसतोली विजयपुर निवासी अवकाश प्राप्त शिक्षक शिक्षक गणेश दत्त पांडे यहां राम मंदिर जाने वाले रास्ते के समीप ठाकुरद्वारा में रहते हैं। उनमें फूल के पौध लगाना और उनकी सुरक्षा करने का शौक बचपन से ही रहा है। लोगों की दिनचर्या चाय पीने या अखबार पढ़ने से शुरू होती, लेकिन उनकी दिनचर्या तो बगीचे में एक नजर दौड़ाने से हुआ करती है।
करीब एक नाली बगीचे में गेंदा पीला, गुलाबी, पीटूनियां, कलेंडोला, पैंजी, गुलदावरी, गुलाब और फायरबॉल समेत कई प्रजाति के मनमोहक फूल खिले हैं। इसी में वह अपने मतलब की सब्जियां भी पैदा कर लेते हैं। वह बताते हैं कि फूल उगाने से जहां समय का सदुपयोग होता है वहीं इससे पर्यावरण में भी निखार आता है।
वह कहते हैं कि बगैर आवश्यकता के फूलों को किसी भी दशा में नहीं तोड़ना चाहिए। फूल घर की शोभा बढ़ाने के साथ ही राह चलते लोगों का भी मन भी मोहते हैं। उनका कहना है कि लोगों को घर के आसपास की खाली जगह में फूलों के पौध अवश्य लगाने चाहिए।