बागेश्वर। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में विज्ञान की शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। छात्रों और शिक्षकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रदेश में 21 दिवसीय विज्ञान यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। साइंस इन द सर्विस ऑफ सोसाइटी की ओर से आयोजित यात्रा का मुख्य उद्देश्य रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर प्रयोगात्मक और अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देना है।
यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता देश के सुप्रसिद्ध भौतिकविद और आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर पद्मश्री डॉ. हरिश्चंद्र वर्मा की सहभागिता है। प्रो. वर्मा, जो अपनी पुस्तक कॉन्सेप्ट्स ऑफ फिजिक्स के लिए दुनिया भर में विख्यात हैं, इस यात्रा के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान के कठिन सिद्धांतों को सरल प्रयोगों के जरिये समझाएंगे। उनके 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह यात्रा 12 मई से एक जून 2026 तक पूरे राज्य में संचालित की जाएगी। विज्ञान यात्रा उत्तराखंड के भीमताल, बागेश्वर और अल्मोड़ा डायट केंद्रों से होकर गुजरेगी। शहीद सैनिक विद्यालय नैनीताल, जीआईसी वज्यूला, जीजीआईसी द्वाराहाट शिक्षण संस्थानों में भी यात्रा पहुंचेगी, इसके अतिरिक्त उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी, बीईओ द्वाराहाट और एसईएस देहरादून, श्रमयोग सल्ट और हल्द्वानी में भी विभिन्न गतिविधियां आयोजित होंगी।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप अनुभवात्मक शिक्षण
कार्यक्रम समन्वयक भवानी शंकर कांडपाल ने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 भी अनुभवात्मक शिक्षण पर जोर देती है। इस यात्रा के माध्यम से शिक्षकों को परिवेशी संसाधन आधारित भौतिकी पर प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों से विज्ञान के प्रयोग कक्षा में दिखा सकें। 18 और 19 मई को डायट अल्मोड़ा में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला भी इसी कड़ी का हिस्सा है। 20 और 21 मई को डायट बागेश्वर में विद्यार्थियों से संवाद और शिक्षकों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी।