इंसान में कुछ करने की ललक हो तो खुद प्रयोग करके दिखाना होता है। समाज तब उससे सीख लेकर आगे बढ़ सकता है। वज्यूला के शिक्षित बेरोजगार हेम पंत ने कुछ ऐसा ही करके दिखाया है। हेम ने सरकारी और प्राईवेट नौकरी करने की सोच नहीं रखी। उन्होंने 15 साल पहले मात्र आठ सौ रुपए से अचार और शहद की बिक्री करने का काम शुरू किया। आज उनकी औद्योगिक समिति का साल भर का टर्न ओवर ढाई करोड़ के आसपास पहुंच गया है।
वज्यूला गांव निवासी हेम पंत बचपन से मेहनती थे। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भागीदारी करने के साथ-साथ 15 साल पहले अचार और शहद की बिक्री करने से काम शुरू किया था। ग्रामीण परिवेश के हेम पंत ने एक फार्मेसी की दुकान के पीछे एक कमरे से काम शुरू किया। तब गिरीश पांडे ने उन्हें समिति के विकास के लिए प्रेेरित किया। समिति के साथ उन्होंने कई युवा बेरोजगारों को जोड़ा। वर्तमान में उनकी पुरूड़ा गागरीगोल में हिमालयन आर्गेनिक औद्योगिक उत्पादन समिति नाम से एक औद्योगिक समिति है। जहां अचार, जैम, मडुवे, काले भट की नमकीन, अचार आदि बनता है।
समिति के अध्यक्ष नरेंद्र रावत ने बताया कि समिति से ढाई हजार से अधिक काश्तकार प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि समिति के उत्पादों की बाजार में काफी मांग है। कभी कभी तो समिति मांग के अनुसार उत्पाद नहीं दे पाती है। समिति का साल भर का टर्न ओवर ढाई करोड़ के आसपास का है। समिति के उत्तराखंड के विभिन्न बाजारों में चार सौ से अधिक सेल काउंटर है। समिति के सचिव हेम पंत ने बताया कि समूह बनाकर उत्तराखंड के शिक्षित बेरोजगार काम करें तो पलायन पर विराम जरूर लगेगा।
उन्होंने बताया कि समिति की फैक्ट्री में जैविक उत्पादों से सामग्री बनती है। काश्तकारों से समिति सीधे जुड़ी है। समिति के कारोबार से खुश पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने बताया कि उत्तराखंड से हो रहे पलायन को रोकने के लिए सरकार सोलह सालों में कुुछ नहीं कर पायी है। उन्होंने बताया कि हेम पंत जैसे लोग स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए आगे आए तो पलायन पर विराम लगेगा। गांव खाली होने से बचेंगे।