गरुड कौसानी में पंत जी प्रतिमा में माल्यार्पण करते मुख्य अतिथि भट्ट।
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कविवर सुमित्रानंदन पंत की 117 वीं जयंती पंत विथिका कौसानी में धूमधाम से मनाई गई। मुख्य अतिथि गोपाल दत्त भट्ट ने संस्कृति विभाग से कौसानी में शोध संस्थान खोलने और पंत जयंती के दिन साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को पंत सम्मान से देने की मांग की।
समारोह का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कवियों ने पंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया। उन्होंने संस्कृति विभाग से पंत की जन्म भूमि कौसानी में शोध संस्थान खोलने और पंत जयंती के दिन साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को पंत सम्मान से सम्मानित करने को कहा। काव्य गोष्ठी की शुरुआत युवा कवि मनोज खोलिया ने अपनी कविता ‘निरीह मत बनो कुचल दिए जाओगे, क्योंकि जमाना हमारा नहीं निष्ठुर प्राणघातियों का है’। युवा कवि चंद्रशेखर बड़सीला ने सुनाया- कौसानी की पावन भूमि में हृदय के तार झंकृत हुए महाकवि पंत के ।
कवि बची गिरी ने इज कुड़िक सैक उ छु माट में दमन है जै आपण कुंढी बनूं है। मोहन जोशी ने कौसानी का वर्णन इस प्रकार किया बापू के चरण रज पड़े जहां, ईश प्रार्थना यहीं की थी कवि के उघड़े प्रथम चक्षु यही है सुमित्रा नंदन वीथी। कवि रमेश पांडे बृजवासी, मनोज दानू आदि ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी लीलाधर पांडे ने की। वहां विथिका के प्रभारी ज्ञान प्रकाश तिवारी, जेसी भट्ट, रेवाधर वैष्णव, थ्रीश कपूर, दिनेश अवस्थी, डा. हरीश शुक्ला, पूजा मेहरा, कांता बहन आदि मौजूद थे।