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शोधित बीज बोकर लें अधिक मुनाफा 

Mon, 25 Apr 2016 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
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कृषि गोष्ठी - फोटो : अमर उजाला
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 कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से टाना गांव में कृषि प्रक्षेत्र दिवस मनाया गया। गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नवल किशोर सिंह ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिक आधार पर ही कृषि करें, ताकि उत्पादन अधिक हो। उन्होंने किसानों से शोधित और प्रमाणित बीजों की ही बुवाई करने की अपील की। 
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डॉ. सिंह ने कृषकों को बताया कि वीएल 829 गेहूं द्विउद्देशीय प्रजाति है, जिसे सिंचाई वाली भूमि पर हरा चारा और दाने के लिए उगाया जाता है। इसकी बुवाई के 70 से 90 दिन के बाद जमीन से पांच सेमी छोड़कर काटने से हरा चारा 15 क्विंटल प्रति नाली मिलता है। यह समय से बुवाई और सिंचित खेती के लिए अनुकूल है। इसके पकने की अवधि 200 से 218 दिन है। सिंचाई भूमि में 75 से 90 किलो प्रति नाली और असिंचित भूूमि में 45 से 60 किलो प्रति नाली उपज मिलती है। इस वर्ष सूखे की स्थिति को देखते हुए उत्पादित गेेहूूं के बीज को आगामी वर्ष के लिए रखने की सलाह दी। विशेषज्ञ पादप सुरक्षा हरीश जोशी ने गेहूं में लगने वाले अनावृत कंड कोलीन, पीला रतुवा और पहाड़ी बंट रोगों के प्रबंधन की जानकारी दी। वीएल 829 प्रजाति पीला रतुवा रोग के प्रति प्रतिरोधी है। इस दौरान निधि सिंह, टाना के पूर्व ग्राम प्रधान, करम बिष्ट, प्रगतिशील काश्तकारों में उमेद सिंह, विशन सिंह, गोपाल सिंह, गीता देवी, विशन सिंह, गोपाल सिंह और गीता देवी आदि थे। ब्यूरो 
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